जर्मन शोधकर्ताओं ने BFId तकनीक के जरिए दिखाया कि सामान्य Wi-Fi सिग्नल्स से बिना स्मार्टफोन या कैमरे के भी इंसानों की पहचान और मूवमेंट ट्रैक की जा सकती है।

“सिर्फ Wi-Fi से हो सकती है आपकी जासूसी”: बिना स्मार्टफोन और कैमरे के इंसानों को ट्रैक करने वाली नई टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई चिंता

Team The420
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नई दिल्ली। डिजिटल प्राइवेसी और निगरानी को लेकर दुनिया भर में नई बहस छिड़ गई है। जर्मनी के कार्लसरुहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जो केवल सामान्य Wi-Fi सिग्नल्स के जरिए किसी इंसान की गतिविधियों और पहचान को ट्रैक कर सकती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके लिए व्यक्ति के पास स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होना भी जरूरी नहीं है।

रिसर्चर्स ने इस तकनीक को “BFId” नाम दिया है। यह Wi-Fi टेक्नोलॉजी के एक सामान्य फीचर “Beamforming Feedback Information” यानी BFFI का इस्तेमाल करती है। यह फीचर Wi-Fi 5 और उसके बाद के नेटवर्क स्टैंडर्ड्स में सिग्नल क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए शामिल किया गया था। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार, यही फीचर अब प्राइवेसी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, Wi-Fi सिग्नल लगातार वातावरण में फैलते रहते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी कमरे या स्थान के भीतर चलता है, तो उसके शरीर की वजह से इन रेडियो वेव्स में सूक्ष्म बदलाव आता है। BFId तकनीक इन्हीं बदलावों को रिकॉर्ड कर इंसानी मूवमेंट का विश्लेषण करती है। रिसर्चर्स ने मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स का इस्तेमाल करके ऐसी “रेडियो इमेज” तैयार की, जो किसी कैमरे की तरह व्यक्ति की गतिविधियों का पैटर्न पहचान सकती है।

अध्ययन के दौरान 197 लोगों पर परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह तकनीक लोगों की चाल, शरीर की बनावट और मूवमेंट पैटर्न के आधार पर 99.5 प्रतिशत तक सटीक पहचान करने में सक्षम रही। यानी यदि कोई व्यक्ति किसी स्थान पर बार-बार आता-जाता है, तो केवल Wi-Fi सिग्नल्स के जरिए उसकी पहचान और गतिविधियों की निगरानी की जा सकती है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस शोध को डिजिटल सर्विलांस के क्षेत्र में बड़ा बदलाव बताया है। उनका कहना है कि अब तक लोगों को लगता था कि ट्रैकिंग केवल स्मार्टफोन, GPS, कैमरा या स्मार्ट डिवाइस के जरिए ही संभव है, लेकिन यह तकनीक दिखाती है कि सामान्य Wi-Fi नेटवर्क भी निगरानी का माध्यम बन सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह ट्रैकिंग बिना व्यक्ति की जानकारी और अनुमति के की जा सकती है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, भविष्य में ऐसी तकनीकों का दुरुपयोग निगरानी, प्रोफाइलिंग और जासूसी के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के डेटा को पुराने लोकेशन रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों या स्मार्टफोन डेटा के साथ जोड़ दिया जाए, तो किसी व्यक्ति की पूरी पहचान, दिनचर्या और व्यवहार का विस्तृत प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। उनके मुताबिक, यह तकनीक विशेष रूप से पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि सार्वजनिक स्थानों जैसे मॉल, एयरपोर्ट, होटल, कॉरपोरेट ऑफिस और रेलवे स्टेशन में लगे Wi-Fi नेटवर्क भविष्य में बड़े पैमाने पर निगरानी के उपकरण बन सकते हैं। यदि पर्याप्त सुरक्षा और एन्क्रिप्शन नहीं अपनाए गए, तो कोई भी नजदीकी डिवाइस इन सिग्नल्स को रिकॉर्ड कर सकता है।

रिसर्चर्स ने अंतरराष्ट्रीय टेक संगठनों और रेगुलेटरी एजेंसियों से Wi-Fi स्टैंडर्ड्स में मजबूत प्राइवेसी सुरक्षा और एन्क्रिप्शन लागू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में BFFI डेटा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और भविष्य के नेटवर्क प्रोटोकॉल में अतिरिक्त सुरक्षा जरूरी होगी।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल उपयोगकर्ताओं को सार्वजनिक Wi-Fi नेटवर्क का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना चाहिए और अपने राउटर तथा नेटवर्क डिवाइस को नियमित रूप से अपडेट रखना चाहिए। सिक्योरिटी पैच और नए फर्मवेयर अपडेट्स ही इस तरह की संभावित कमजोरियों से बचाव का सबसे व्यावहारिक तरीका माने जा रहे हैं।

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