पटना: NEET UG 2026 और नीट पुनर्परीक्षा 2026 में कथित धांधली की जांच कर रही बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अब उन मूल परीक्षार्थियों की तलाश तेज कर दी है, जिन्होंने कथित तौर पर अपनी जगह दूसरे छात्रों यानी स्कॉलर या सॉल्वर को परीक्षा में बैठाया। जांच एजेंसी ने ऐसे 17 परीक्षार्थियों को चिन्हित किया है और उनके नाम, पते समेत पूरा विवरण राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से मांगा है। एजेंसी का उद्देश्य इन अभ्यर्थियों तक पहुंचकर यह पता लगाना है कि परीक्षा में उनकी जगह कौन बैठा, सॉल्वर नेटवर्क से उनका संपर्क कैसे हुआ और इसके लिए किसी तरह का भुगतान किया गया था या नहीं।
मामले में गिरफ्तार पावापुरी मेडिकल कॉलेज के दो छात्र डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट और डॉ. उज्जवल से विस्तृत पूछताछ की तैयारी भी चल रही है। दोनों को रिमांड पर लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि दोनों कथित सॉल्वर नेटवर्क की अहम कड़ियों के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
NTA से मांगी गई 17 अभ्यर्थियों की जानकारी
EOU ने NTA से 17 मूल परीक्षार्थियों की पहचान से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा है। इसमें उनके नाम, पते और परीक्षा से संबंधित अन्य विवरण शामिल हैं। जांच एजेंसी इन रिकॉर्ड का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को ट्रेस करने और उनके आवेदन तथा परीक्षा केंद्र से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन करने में करेगी।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि अभ्यर्थियों की ओर से जमा कराए गए फोटो, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज वास्तविक थे या परीक्षा के दौरान किसी तरह की हेराफेरी की गई थी। इसके साथ ही उनके मोबाइल नंबर, डिजिटल संपर्क और संभावित वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा सकती है।
लखीसराय के तीन केंद्रों से पकड़े गए थे मेडिकल छात्र
सूत्रों के मुताबिक, जून 2026 में हुई नीट पुनर्परीक्षा के दौरान कथित धांधली का मामला सामने आया था। लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों से करीब एक दर्जन मेडिकल छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। ये छात्र बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे थे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन मेडिकल छात्रों ने मूल परीक्षार्थियों की जगह कथित तौर पर स्कॉलर के रूप में परीक्षा दी। मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने के कारण उनके पास परीक्षा में मदद करने के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता थी। अब EOU यह पता लगा रही है कि इन छात्रों को किसने संपर्क किया और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने तथा अन्य व्यवस्थाओं का इंतजाम किसने किया।
एक मूल परीक्षार्थी का आरोपी से पारिवारिक संबंध
जांच में एक मूल परीक्षार्थी मधु प्रिया का नाम भी सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, उसकी पहचान सॉल्वर गिरोह के प्रमुख आरोपियों में शामिल बताए जा रहे मेडिकल छात्र डॉ. रविशंकर की पत्नी के रूप में हुई है। इस संबंध ने जांच को एक नया पहलू दिया है।
EOU अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मधु प्रिया के लिए भी उसी नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर परीक्षा की व्यवस्था की गई थी या नहीं। साथ ही अन्य मूल परीक्षार्थियों और गिरफ्तार मेडिकल छात्रों के बीच किसी तरह के व्यक्तिगत, डिजिटल या वित्तीय संबंध की भी जांच की जा रही है।
कई मूल परीक्षार्थी अब भी फरार
मामले में शुभम कुमार, इशान सिंह, अक्षत दूबे, निरंजन, नंदनी राज, राहुल प्रिंस, संजीत कुमार और प्रभात अमन समेत कई मूल परीक्षार्थियों के अब तक नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है। EOU अब NTA से मिलने वाले विवरण के आधार पर इन अभ्यर्थियों का पता लगाने की कोशिश करेगी।
जांच एजेंसी उनके आवेदन फॉर्म, परीक्षा केंद्र, फोटो, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड का मिलान करेगी। इसके जरिए यह स्पष्ट करने का प्रयास होगा कि किन परीक्षार्थियों की जगह कथित तौर पर दूसरे छात्रों ने परीक्षा दी थी।
सॉल्वर नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाल रही EOU
जांच अब केवल गिरफ्तार मेडिकल छात्रों तक सीमित नहीं है। EOU यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क में अभ्यर्थियों से संपर्क करने, स्कॉलर की व्यवस्था करने और भुगतान संभालने की जिम्मेदारी किन लोगों की थी। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, डिजिटल बातचीत और बैंकिंग लेनदेन से नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. रविशंकर और डॉ. उज्जवल को रिमांड पर लेकर पूछताछ के बाद जांच एजेंसी को कथित सॉल्वर नेटवर्क की कार्यप्रणाली, उससे जुड़े अन्य लोगों और परीक्षा में पहचान बदलकर बैठने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
