रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की वर्ष 2023 में आयोजित पोस्ट ग्रेजुएट टीचर एग्जामिनेशन (PGTE) में भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धांधली किए जाने का मामला सामने आया है। JPSC परीक्षा मामले में आरोपी अभय तिवारी ने अपने कथित कबूलनामे में दावा किया है कि उसने खुद ‘अजय संग्राम’ नाम के व्यक्ति के जरिए PGT English की परीक्षा में गड़बड़ी कराकर सफलता हासिल की थी। परीक्षा में सफल होने के बाद उसकी तैनाती देवघर जिले में हुई थी। अभय ने एक अन्य व्यक्ति सुनील कुमार की भी कथित तौर पर इसी तरह बहाली कराने की बात कही है।
अभय के बयान में परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले निर्देश और कंप्यूटर सिस्टम के कथित रिमोट एक्सेस से लेकर सॉल्वर के जरिए सवाल हल कराने तक की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। इन आरोपों के बाद जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि PGTE परीक्षा में कथित गड़बड़ी कितने अभ्यर्थियों तक पहुंची और इसमें कितने लोग शामिल थे।
18 अगस्त से 10 सितंबर 2023 तक हुई थी परीक्षा
JSSC ने PGTE परीक्षा 18 अगस्त से 10 सितंबर 2023 के बीच कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की थी। परीक्षा का परिणाम 1 मार्च 2024 को जारी किया गया था। इसके आधार पर कुल 3,120 पदों पर नियुक्ति की गई थी। अब सामने आए आरोपों के बाद परीक्षा के परिणाम और नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर सिस्टम में अनधिकृत पहुंच किस स्तर पर बनाई गई और क्या परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया था।
रिमोट एक्सेस से सॉल्वर तक पहुंच
अभय के कथित बयान के अनुसार, परीक्षा में पैसे देने वाले अभ्यर्थियों को ऐसे कंप्यूटर सिस्टम पर बैठाया जाता था, जिनका रिमोट एक्सेस दूसरे कमरे में मौजूद सॉल्वर के पास रहता था। सॉल्वर कथित तौर पर दूर बैठकर कंप्यूटर पर सवालों के जवाब देता था।
धांधली में शामिल अभ्यर्थियों को केवल दिखावे के लिए अपने कंप्यूटर का माउस इधर-उधर चलाने को कहा जाता था, ताकि परीक्षा केंद्र में मौजूद निगरानी व्यवस्था को किसी तरह का संदेह न हो। इस कथित तरीके से अभ्यर्थी परीक्षा में स्वयं शामिल होने का भ्रम पैदा करते थे, जबकि जवाब कोई दूसरा व्यक्ति देता था।
अजय संग्राम पर केंद्र मैनेज करने का आरोप
अभय के मुताबिक, बूटी मोड़ स्थित एक परीक्षा केंद्र के मालिक अजय संग्राम की कथित तौर पर इस पूरी व्यवस्था में अहम भूमिका थी। आरोप है कि वह पहले से अभ्यर्थियों को निर्देश देता था कि परीक्षा केंद्र पर किस रंग के कपड़े पहनकर आना है और किस लाइन में खड़ा होना है।
अभय ने दावा किया है कि रांची के नव्या और संस्कार आईटी समेत बोकारो के दो परीक्षा केंद्रों को अजय संग्राम ने कथित तौर पर मैनेज किया था। जांच एजेंसियां अब इन केंद्रों की परीक्षा प्रक्रिया, तकनीकी रिकॉर्ड और वहां तैनात कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर सकती हैं।
कई लोगों के नाम सामने आने से जांच तेज
अभय के कथित बयान में पटना के इमरान, गिरिडीह के राजेश, बोकारो के शंकर, अजय संग्राम के करीबी बताए जा रहे मनोज और हजारीबाग के सुनील कुमार के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियां इन सभी की भूमिका और आपसी संपर्क की जानकारी जुटा रही हैं।
PGTE परीक्षा का आयोजन JSSC की ओर से सत्वत इन्फोसोल प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कराया गया था। अब जांच में एजेंसी की तकनीकी व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों के सिस्टम, लॉग रिकॉर्ड और रिमोट एक्सेस से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित सिस्टम एक्सेस कैसे हासिल किया गया, कितने अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिला और नियुक्ति के बाद उनकी वास्तविक योग्यता क्या थी। अभय के बयान की स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्टि होने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
