रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितता और अवैध वसूली की जांच कर रही CID ने सोमवार को एक और गिरफ्तारी की। जांच एजेंसी ने JPSC की तत्कालीन सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक (PA) ब्रज राम को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने इंटरव्यू बोर्ड को कथित तौर पर प्रभावित कर अभ्यर्थियों के नंबर बढ़वाने और चयन में मदद पहुंचाने के बदले रकम की वसूली की। जांच में यह रकम करीब ₹60 लाख तक होने का दावा किया गया है। गिरफ्तारी के बाद CID अब ब्रज राम से पूछताछ कर इस कथित नेटवर्क की वित्तीय और प्रशासनिक कड़ियों का पता लगाने में जुटी है।
जांच में JPSC के तत्कालीन चेयरमैन एल. ख्यांगते के अलावा तत्कालीन सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य और डॉ. जमील अहमद की भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में कथित ‘सेटिंग’ कैसे होती थी, रकम किस माध्यम से पहुंचाई जाती थी और इसके बदले उन्हें किस तरह लाभ पहुंचाया जाता था।
अभय तिवारी के बयान से खुलीं कई कड़ियां
CID की जांच में परीक्षा घोटाले के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के बयान को अहम माना जा रहा है। उसके अनुसार, नामकुम के जोरार निवासी आदित्य पांडेय ने कथित तौर पर PA ब्रज राम, TDPL निदेशक रामवीर सिंह, तत्कालीन चेयरमैन एल. ख्यांगते, जमाल अहमद और अजीता भट्टाचार्य से संपर्क किया था। आरोप है कि इस संपर्क के जरिए सात अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में नंबर बढ़वाने की व्यवस्था की गई।
जांच एजेंसी अब इन सात अभ्यर्थियों की पहचान, उनके इंटरव्यू रिकॉर्ड और उनसे जुड़े संभावित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि इन अभ्यर्थियों को किस आधार पर संबंधित इंटरव्यू बोर्ड में भेजा गया और क्या उनके चयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था।
एजेंट के जरिए पैनल तक पहुंचाने का आरोप
अभय के कथित बयान के मुताबिक, परीक्षा में सफल हुए तीन अभ्यर्थियों का संपर्क ‘लालू यादव’ नामक एजेंट के माध्यम से हुआ था। आरोप है कि इसके बाद इन अभ्यर्थियों को एल. ख्यांगते और अजीता भट्टाचार्य के इंटरव्यू बोर्ड में भेजा गया। जांच एजेंसी अब एजेंट और अभ्यर्थियों के बीच संपर्क तथा संभावित लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
एक DSP बने अभ्यर्थी के बारे में भी आरोप सामने आया है कि उसकी इंटरव्यू में कथित सेटिंग ब्रज राम के माध्यम से कराई गई थी। वहीं, एक अन्य DSP बने अभ्यर्थी ने कथित तौर पर पतंजलि कोचिंग से जुड़े रवि कुमार के जरिए इंटरव्यू पैनल में व्यवस्था कराई और परीक्षा में सफलता हासिल की।
गोपनीय कोड डिकोड करने का भी आरोप
जांच में परीक्षा प्रक्रिया के दूसरे स्तरों पर कथित हेरफेर की बात भी सामने आई है। आरोप है कि TDPL निदेशक रामवीर सिंह पर अभ्यर्थियों के गोपनीय कोड को डिकोड करने का दबाव बनाया जाता था। इसके जरिए अभ्यर्थियों की पहचान सामने आने के बाद कथित तौर पर उनके लिए आगे की प्रक्रिया प्रभावित की जाती थी।
इंटरव्यू के दौरान भी पहले से तय व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों को संबंधित JPSC सदस्य के पैनल में भेजने का आरोप है। जिस अभ्यर्थी की जिस सदस्य के साथ कथित तौर पर पहले से ‘सेटिंग’ होती थी, उसे उसी सदस्य वाले इंटरव्यू बोर्ड में भेजे जाने की बात जांच में सामने आई है।
CDPO परीक्षा में भी वसूली का आरोप
जांच के दौरान JPSC की CDPO परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। अभय तिवारी ने कथित तौर पर बताया कि TDPL की ओर से अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के बदले प्रति उम्मीदवार ₹10 लाख तक लिए गए। इस मामले में उसने ‘भारती’ नाम की एक सफल अभ्यर्थी का नाम भी जांच एजेंसी के सामने बताया है।
अब CID ब्रज राम से पूछताछ कर कथित वसूली, पैनल फिक्सिंग और अन्य आरोपों से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है। बैंक खातों, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, इंटरव्यू दस्तावेज और अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। हालांकि, सामने आए आरोपों की स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्टि होना बाकी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और अभ्यर्थियों के चयन में किस स्तर तक अनियमितता हुई।
