लक्सर (रुड़की): लक्सर क्षेत्र में कथित तौर पर बिना अनुमति रक्तदान शिविर लगाकर रक्त एकत्र करने और उसे ऊंची कीमत पर बेचने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह गांव-देहात में शिविर लगाकर लोगों से रक्त एकत्र करता था और बाद में उसे बिजनौर क्षेत्र में ₹12 हजार से ₹15 हजार प्रति यूनिट की कीमत पर बेचने की तैयारी में था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 यूनिट रक्त, रक्त संग्रह से संबंधित सामग्री और शिविर लगाने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने इससे पहले कितने स्थानों पर ऐसे शिविर लगाए और कितने लोगों से रक्त एकत्र किया गया।
पुलिस के अनुसार, 16 अगस्त को सूचना मिली थी कि कुछ लोग ग्रामीण इलाकों में बिना अनुमति रक्तदान शिविर आयोजित कर रहे हैं। आरोप था कि इन शिविरों में एकत्र रक्त को किसी अधिकृत ब्लड बैंक में जमा कराने के बजाय दूसरे राज्यों में बेचने की तैयारी की जा रही थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई और वाहनों की जांच शुरू की।
कार की डिग्गी में आइस बॉक्स से मिले 27 बैग
पुलिस ने रविवार देर रात अलावलपुर तिराहे पर एक संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली। कार की डिग्गी में रखे आइस बॉक्स को खोलने पर उसमें रक्त से भरे 27 बैग मिले। इसके अलावा रक्त संग्रह और जांच से संबंधित कई उपकरण भी बरामद किए गए। पुलिस ने रक्त के रखरखाव और परिवहन से जुड़े पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसे कहां से एकत्र किया गया था और इसे किस स्थान पर भेजा जाना था।
जांच के दौरान दूसरी कार से भी बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ। इसमें चार डोनर चेयर, डोनर फॉर्म बुक, वजन करने की मशीन, अमृत चैरिटेबल ब्लड सेंटर के 28 प्रमाणपत्र, स्लाइड का डिब्बा और हाथ बांधने वाली चार बेल्ट समेत अन्य सामग्री शामिल है। पुलिस को आशंका है कि इसी सामान का इस्तेमाल अलग-अलग स्थानों पर कथित रक्तदान शिविर आयोजित करने में किया जाता था।
पांच आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने मामले में अनित सैनी निवासी फतवा, लक्सर, शुभम निवासी माड़ाबेला, खानपुर, दुष्यंत कुमार निवासी बिजनौर, कावेन्द्र निवासी मुरादाबाद और दया सिंह निवासी संभल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों से शिविर आयोजित करने, रक्त एकत्र करने, उसके भंडारण और संभावित बिक्री से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद 27 यूनिट रक्त किन लोगों से लिया गया था। इसके लिए कथित शिविरों में शामिल डोनरों और आयोजकों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। साथ ही बरामद प्रमाणपत्रों की वास्तविकता और उनके इस्तेमाल की भी पुष्टि की जा रही है।
रक्त की बिक्री के नेटवर्क की जांच
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर एक यूनिट रक्त को ₹12 हजार से ₹15 हजार में बेचता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रक्त के संभावित खरीदार कौन थे और क्या इस गतिविधि में किसी अस्पताल, ब्लड बैंक या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी। दूसरे राज्यों तक रक्त पहुंचाने की आशंका को देखते हुए जांच का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है।
रक्तदाता भी बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तदान से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिविर किसी अधिकृत ब्लड बैंक या वैध स्वास्थ्य संस्था से जुड़ा हो। रक्तदाता को यह जानकारी भी लेनी चाहिए कि एकत्र रक्त कहां भेजा जाएगा और उसकी जांच किस केंद्र पर होगी। केवल किसी संस्था के नाम या मरीजों की मदद का हवाला देकर आयोजित शिविर में बिना सत्यापन रक्तदान करने से बचना चाहिए। ब्लड बैंक संचालित करने के लिए वैध लाइसेंस जरूरी है और बिना अनुमति रक्त संग्रह या भंडारण स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला हो सकता है। पुलिस बरामद सामग्री और दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
