पटना पुलिस ने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ₹30 करोड़ की कथित साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है।

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ₹30 करोड़ की साइबर ठगी, 5 राज्यों तक फैला नेटवर्क

Team The420
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पटना: सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पटना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मीठापुर से गिरफ्तार नौ साइबर ठगों से पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, किसान सम्मान निधि, पीएम विश्वकर्मा, पीएम आवास योजना समेत पांच सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को झांसा देता था। पुलिस की जांच में गिरोह के 17 बैंक खातों में करीब ₹30 करोड़ की रकम मिलने की जानकारी सामने आई है। आशंका है कि यह रकम साइबर ठगी से जुड़ी हो सकती है। पुलिस ने सभी खातों को फ्रीज कर दिया है और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

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पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने मीठापुर इलाके में एक फ्लैट किराये पर लिया था। मकान मालिक और आसपास के लोगों को बताया गया था कि यहां किसी निजी कंपनी का कार्यालय संचालित किया जाएगा। संदेह से बचने के लिए फ्लैट में बाकायदा लैपटॉप, कंप्यूटर और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। इसी जगह से लोगों को फोन कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कथित तौर पर ठगी की जाती थी।

फर्जी कॉल सेंटर में छह कर्मचारी

जांच में सामने आया है कि गिरोह ने फर्जी कॉल सेंटर के संचालन और रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए करीब छह कर्मचारियों को रखा था। ये कर्मचारी संभावित पीड़ितों की पहचान कर उन्हें फोन करते थे और सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता, लोन या आवास का लाभ दिलाने का दावा करते थे।

गिरोह खासतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जो किसी दस्तावेज की कमी, आवेदन में तकनीकी समस्या या अन्य कारणों से सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे। ऐसे लोगों को फोन कर साइबर ठग उनकी समस्या दूर करने और आवेदन स्वीकृत कराने का भरोसा देते थे। इसके बाद जरूरी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी और अन्य गोपनीय विवरण हासिल कर कथित तौर पर रकम की ठगी की जाती थी।

पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क

पूछताछ में गिरोह का नेटवर्क बिहार से बाहर भी फैला होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी इसके सदस्यों की गतिविधियों के सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियां इन राज्यों में गिरोह से जुड़े संदिग्धों की पहचान कर रही हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह में दो दर्जन से अधिक अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।

17 बैंक खाते फ्रीज, ₹30 करोड़ की जांच

पुलिस ने 14 अगस्त को मीठापुर में कार्रवाई कर नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पिछले चार दिनों में जांच के दौरान अलग-अलग बैंकों में संचालित 17 खातों को फ्रीज कराया गया। इनमें मीठापुर से गिरफ्तार आरोपियों के पांच खाते शामिल हैं। इसके अलावा राजीवनगर, कंकड़बाग और जमुई से गिरफ्तार किए गए तीन अन्य आरोपियों से जुड़े खातों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, इन 17 खातों में करीब ₹30 करोड़ की रकम होने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसमें साइबर ठगी से हासिल रकम शामिल हो सकती है। अब बैंक स्टेटमेंट, लेनदेन की तारीख, रकम भेजने वाले खातों और आगे ट्रांसफर किए गए पैसों की जांच की जा रही है।

पूरे नेटवर्क की तलाश जारी

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी कॉल सेंटर के लिए संभावित पीड़ितों का डेटा कहां से हासिल किया जाता था और बैंक खातों का इंतजाम कौन करता था। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच से नेटवर्क की अन्य कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और खातों की वित्तीय जांच पूरी होने के बाद ठगी के कुल पैमाने का पता चल सकेगा।

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