रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते को विभिन्न JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितता और रिश्वत से जुड़े मामले में 48 घंटे की पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। CID ने उन्हें 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद जांच एजेंसी ने उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। अब जांच एजेंसी पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले की आगे की कड़ियां जोड़ रही है।
रिमांड के दौरान ख्यांगते से उनके कार्यकाल में JPSC की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल किए गए। जांच का प्रमुख केंद्र ब्लैकलिस्टेड बताई जा रही कंपनी TDPL को परीक्षा संचालन से संबंधित काम दिए जाने की प्रक्रिया रही। इसके अलावा काम देने के बदले कथित तौर पर ₹2 करोड़ और प्रत्येक भुगतान पर 20 प्रतिशत कमीशन से जुड़े आरोपों पर भी पूछताछ की गई।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम देने पर सवाल
CID यह पता लगाने में जुटी है कि ख्यांगते के JPSC चेयरमैन का पद संभालने के बाद TDPL को परीक्षा से संबंधित काम किस प्रक्रिया के तहत दिया गया। जांच में यह देखा जा रहा है कि कंपनी के चयन के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
जांच एजेंसी के सामने यह आरोप भी है कि TDPL को काम दिलाने के लिए कथित तौर पर आर्थिक लेनदेन की व्यवस्था की गई थी। इसी सिलसिले में ₹2 करोड़ और भुगतान की रकम पर 20 प्रतिशत कमीशन से जुड़े सवाल ख्यांगते से किए गए। CID अब इस कथित वित्तीय व्यवस्था की पुष्टि दस्तावेजों और अन्य आरोपियों के बयानों से करने की कोशिश कर रही है।
14वीं JPSC परीक्षा की OMR शीट भी जांच में
पूछताछ के दौरान 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा की OMR शीट से कथित छेड़छाड़ को लेकर भी सवाल किए गए। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा के बाद OMR शीट या उससे जुड़े रिकॉर्ड में किसी तरह का बदलाव किया गया था या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो संबंधित रिकॉर्ड तक किन लोगों की पहुंच थी।
जांच में परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। तकनीकी कर्मचारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
अभय तिवारी समेत आरोपियों के बयानों के आधार पर पूछताछ
CID ने ख्यांगते से पूछताछ के दौरान कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार के बयानों में सामने आए तथ्यों को आधार बनाया।
जांच के अनुसार, श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर बताया था कि TDPL को नॉमिनेशन के आधार पर परीक्षा का काम दिया गया। वहीं, अभय तिवारी ने अपने बयान में कथित तौर पर बताया कि धर्मेंद्र कुमार के माध्यम से ख्यांगते के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद TDPL को ₹2 करोड़ और प्रत्येक भुगतान पर 20 प्रतिशत कमीशन के कथित समझौते के तहत काम दिए जाने की बात सामने आई।
11वीं से 14वीं JPSC परीक्षाओं की जांच
CID की जांच केवल 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित नहीं है। रिमांड के दौरान ख्यांगते से 11वीं, 12वीं और 13वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षाओं के परिणामों से जुड़े सवाल भी किए गए। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अलग-अलग परीक्षा चक्रों में सामने आई कथित अनियमितताओं के बीच कोई आपसी संबंध था या नहीं।
इसके लिए परीक्षा रिकॉर्ड, विभागीय फैसले, अधिकारियों के बीच संचार और आरोपियों के बयानों का मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित गड़बड़ी किसी एक परीक्षा तक सीमित थी या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।
वित्तीय लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका पर नजर
ख्यांगते की रिमांड खत्म होने के बाद भी मामले की जांच जारी है। CID अब पूछताछ से मिले तथ्यों के आधार पर अतिरिक्त दस्तावेज और बयान जुटा सकती है। एजेंसी TDPL से जुड़े वित्तीय लेनदेन, परीक्षा कार्य आवंटन की प्रक्रिया और कथित कमीशन व्यवस्था की भी पड़ताल कर रही है।
जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेनदेन में किन-किन लोगों की भूमिका थी। साथ ही OMR से कथित छेड़छाड़ और विभिन्न JPSC परीक्षाओं के परिणामों से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
