WFI की आधार-OTP आधारित जांच में जन्मतिथि हेरफेर के आरोप सामने आने के बाद अंडर-17 राष्ट्रीय टूर्नामेंट से 125 से अधिक पहलवान अयोग्य घोषित

आधार-OTP जांच में बड़ा खुलासा: उम्र छिपाकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरने की कोशिश, 125 से अधिक पहलवान अयोग्य घोषित

Team The420
5 Min Read

भारतीय कुश्ती में आयु धोखाधड़ी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई में 125 से अधिक पहलवानों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने आधार कार्ड और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आधारित सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कथित उम्र संबंधी अनियमितताओं का पता लगाया, जिसके बाद इन खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया गया।

मामला उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नंदिनी नगर में आयोजित 2026 अंडर-17 ओपन रैंकिंग नेशनल टूर्नामेंट से जुड़ा है। प्रतियोगिता शुरू होने से एक दिन पहले हुई दस्तावेज जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें खिलाड़ियों की जन्मतिथि संबंधी रिकॉर्ड में कथित बदलाव पाए गए। जांच के बाद 125 से अधिक फ्रीस्टाइल पुरुष पहलवानों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders

महासंघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के आधार नंबरों के माध्यम से दस्तावेजों की जांच की गई। इसके लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP की आवश्यकता पड़ी। इस डिजिटल प्रक्रिया से अधिकारियों को यह देखने में मदद मिली कि समय-समय पर किन दस्तावेजों में क्या बदलाव किए गए और जन्मतिथि से संबंधित रिकॉर्ड कब अपडेट किए गए।

जांच में सामने आया कि कुछ खिलाड़ियों ने कथित तौर पर नए जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, जबकि पुराने रिकॉर्ड अलग तस्वीर पेश कर रहे थे। अधिकारियों का दावा है कि कई मामलों में खिलाड़ियों की वास्तविक आयु निर्धारित पात्रता सीमा से अधिक पाई गई। प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार केवल वर्ष 2009 या उसके बाद जन्मे खिलाड़ी ही अंडर-17 वर्ग में भाग लेने के पात्र थे।

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान एक और दिलचस्प स्थिति सामने आई। कई खिलाड़ियों ने अधिकारियों को OTP उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया और जांच पूरी होने से पहले ही परिसर छोड़ दिया। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में भी दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर संदेह पैदा हुआ।

कुश्ती महासंघ के अधिकारियों का कहना है कि आयु सत्यापन की यह प्रक्रिया केवल फ्रीस्टाइल वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी। ग्रीको-रोमन और महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं से पहले भी इसी तरह की जांच की जाएगी। अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में अयोग्य घोषित खिलाड़ियों की संख्या और बढ़ सकती है।

भारतीय खेलों में आयु धोखाधड़ी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र कम दिखाकर आयु-आधारित प्रतियोगिताओं में भाग लेने से वास्तविक पात्र खिलाड़ियों के अवसर प्रभावित होते हैं और प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं। ऐसे मामलों में खिलाड़ियों को शारीरिक बढ़त मिलने की संभावना रहती है, जिससे खेल भावना और चयन प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

खेल प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि आधार आधारित सत्यापन व्यवस्था भविष्य में आयु धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण का माध्यम बन सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए दस्तावेजों में किए गए बदलावों का क्रमवार पता लगाया जा सकता है, जिससे फर्जी या संशोधित प्रमाणपत्रों की पहचान अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया है। मंगोलिया में आयोजित उलानबटार ओपन रैंकिंग सीरीज में मनीषा ने 57 किलोग्राम वर्ग और नेहा ने 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को बड़ी सफलता दिलाई। मनीषा ने फाइनल में उत्तर कोरिया की प्रतिद्वंद्वी को हराया, जबकि नेहा ने भी कड़े मुकाबले में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इसके अलावा नीलम ने 50 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता। भारतीय दल अब तक प्रतियोगिता में छह पदक हासिल कर चुका है। ग्रीको-रोमन वर्ग में सुनील और नितेश ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि सुमित ने कांस्य पदक हासिल किया।

राष्ट्रीय स्तर पर आयु धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर खिलाड़ियों की सफलता ने भारतीय कुश्ती को एक साथ दो अलग-अलग कारणों से चर्चा में ला दिया है। खेल प्रशासकों का मानना है कि पारदर्शी चयन प्रणाली और कड़े सत्यापन उपाय भविष्य में भारतीय कुश्ती की विश्वसनीयता को और मजबूत करेंगे।

हमसे जुड़ें

Share This Article