पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले में बढ़वण (वाढवण) पोर्ट परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे से जुड़ा एक चौंकाने वाला कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। डहाणू क्षेत्र के एक आदिवासी किसान ने आरोप लगाया है कि उसे सरकारी मुआवजा जल्दी दिलाने का झांसा देकर उसके बैंक खाते से ₹50.27 लाख से अधिक की राशि निकाल ली गई। मामले में तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की पड़ताल में जुट गई हैं।
मामला उस किसान से जुड़ा है जिसकी भूमि बढ़वण पोर्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। शिकायत के अनुसार भूमि अधिग्रहण के एवज में सरकार की ओर से उसे ₹2.93 करोड़ से अधिक का मुआवजा स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने स्वयं को मददगार बताकर किसान का विश्वास जीता और मुआवजे की राशि जल्द खाते में पहुंचाने का आश्वासन दिया। बाद में इसी भरोसे का फायदा उठाकर बैंक खाते से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी में बदलाव कर दिया गया।
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शिकायतकर्ता किरण पालवा की शिकायत पर सूरज गिंभल, धर्मा वलवी और प्रसाद उर्फ मॉन्टी पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने किसान की अशिक्षा और बैंकिंग प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी का लाभ उठाया। जांच में सामने आया है कि डहाणू क्षेत्र के तवा गांव स्थित लगभग 2.30 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था और उसी के बदले मुआवजा स्वीकृत हुआ था।
शिकायत के अनुसार अप्रैल माह में किसान को बोईसर स्थित एक निजी बैंक में ले जाया गया। वहां विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए। आरोप है कि इसी दौरान बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी को बदल दिया गया तथा उनकी जगह अन्य संपर्क विवरण जोड़ दिए गए। इसके बाद खाते से संबंधित सभी बैंकिंग अलर्ट और लेनदेन की सूचनाएं वास्तविक खाताधारक तक पहुंचना बंद हो गईं।
जांच में आरोप लगाया गया है कि मुआवजे की राशि खाते में जमा होने के बाद उसमें से ₹50,27,670 विभिन्न लेनदेन के माध्यम से निकाल लिए गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस रकम का उपयोग सोने के आभूषण खरीदने, कपड़े लेने और अन्य खर्चों में किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इन तथ्यों की पुष्टि विस्तृत वित्तीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता को लंबे समय तक यह जानकारी ही नहीं थी कि उसके खाते में भूमि अधिग्रहण का मुआवजा जमा हो चुका है। बैंक खाते से जुड़ी संपर्क जानकारी बदल जाने के कारण उसे किसी भी प्रकार का एसएमएस या ई-मेल अलर्ट नहीं मिला। बाद में जब खाते के लेनदेन की जानकारी सामने आई तो कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय आदिवासी समुदाय में नाराजगी और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण जैसी प्रक्रियाओं में शामिल मध्यस्थों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी आवश्यक है। उनका मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और बैंकिंग प्रक्रियाओं से कम परिचित लोगों को ऐसे मामलों में आसानी से निशाना बनाया जा सकता है।
वित्तीय अपराध मामलों के जानकारों के अनुसार बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और अन्य संपर्क विवरण में अनधिकृत बदलाव वित्तीय धोखाधड़ी का एक आम तरीका बनता जा रहा है। एक बार संपर्क विवरण बदल जाने पर खाताधारक को लेनदेन की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती और बड़ी रकम निकाल ली जाती है।
Future Crime Research Foundation से जुड़े एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर तकनीकी हैकिंग के बजाय सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं। वे लोगों का विश्वास जीतकर दस्तावेज, हस्ताक्षर, ओटीपी या बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बैंक खाते से जुड़ी जानकारी में बदलाव होने पर खाताधारकों को तुरंत बैंक से पुष्टि करनी चाहिए और समय-समय पर अपने खाते की गतिविधियों की जांच करते रहना चाहिए।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन का विवरण, संबंधित दस्तावेजों और रकम के प्रवाह की पड़ताल कर रही हैं। बढ़वण पोर्ट परियोजना से जुड़े इस कथित फर्जीवाड़े ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा व्यवस्था की पारदर्शिता, लाभार्थियों की सुरक्षा और वित्तीय जागरूकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच के अगले चरण और संभावित खुलासों पर टिकी हुई है।
