कानपुर में राजनीतिक फंड और कमीशन का झांसा देकर स्कूल संचालक दंपती के खातों का इस्तेमाल ₹1.09 करोड़ की साइबर ठगी में किए जाने का मामला सामने आया है।

म्यूल अकाउंट्स से ₹5.28 करोड़ का बैंक लोन घोटाला: फर्जी दस्तावेजों से बैंकिंग सिस्टम को लगाया चूना, आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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विजयवाड़ा में साइबर अपराध पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जिसने फर्जी और म्यूल खातों के जरिए बैंकों से ₹5.28 करोड़ का लोन लेकर बड़ा वित्तीय घोटाला किया। आरोपी की पहचान नेल्लम पवन कुमार के रूप में हुई है, जो कृष्णा जिले के गुडूर गांव का रहने वाला है और विजयवाड़ा में रह रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2019 से अलग-अलग बैंक शाखाओं में कुल 26 बचत खाते खोले और इन्हीं खातों के जरिए लोन और क्रेडिट कार्ड सुविधाएं हासिल कीं।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने बैंकिंग प्रणाली की खामियों का फायदा उठाते हुए फर्जी वेतन पर्चियां, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए। वह पहले ई-सेवा क्षेत्र में काम कर चुका था, जिससे उसे कंप्यूटर और डिजिटल दस्तावेज तैयार करने की तकनीकी जानकारी थी। इसी का उपयोग कर उसने बैंक को गलत जानकारी देकर लोन पास करवाए और बाद में किस्तों का भुगतान बंद कर दिया।

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने अलग-अलग बैंक शाखाओं से भारी रकम हासिल की। इनमें गुंडाला शाखा से लगभग ₹1.76 करोड़, एलुरु रोड शाखा से ₹1.32 करोड़ और मुख्य शाखा से ₹2.20 करोड़ के लोन शामिल हैं। कुल मिलाकर यह राशि ₹5.28 करोड़ तक पहुंचती है।

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साइबर अपराध पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में संपत्ति और दस्तावेज बरामद किए। इनमें लगभग ₹7 करोड़ मूल्य के 34 संपत्ति दस्तावेज, एक कार, एक मोटरसाइकिल, 122 ग्राम सोना, 927 ग्राम चांदी, नौ एटीएम कार्ड और ₹11,500 नकद शामिल हैं। यह बरामदगी घोटाले की गंभीरता को और उजागर करती है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रह चुका है। उसके खिलाफ गुडूर, मछलीपट्टनम टाउन, भवानीपुरम और कृष्णालंका क्षेत्र में पहले से मामले दर्ज हैं, जिससे उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि स्पष्ट होती है।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से बैंकिंग सिस्टम को धोखा देने की योजना पर काम कर रहा था और उसने म्यूल खातों का उपयोग कर लेन-देन को छिपाने की कोशिश की। इन खातों के जरिए वह बैंक से मिली रकम को अलग-अलग माध्यमों में घुमाता रहा ताकि जांच एजेंसियों को पता न चल सके।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अन्य बैंक शाखाओं से भी लोन हासिल किए गए हैं।

यह मामला एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल फ्रॉड और म्यूल अकाउंट्स के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम और लगातार निगरानी की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े वित्तीय घोटालों को रोका जा सके।

पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में म्यूल खातों की पहचान और केवाईसी प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत है। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ इस तरह के फर्जीवाड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि क्या आरोपी ने किसी संगठित गिरोह के साथ मिलकर यह पूरा नेटवर्क तैयार किया था, जिससे पूरे वित्तीय सिस्टम को लंबे समय तक चकमा दिया जा सके।

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