वाराणसी पुलिस ने IPL निवेश के नाम पर चल रहे ₹700 करोड़ के साइबर–हवाला रैकेट का खुलासा कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

IPL निवेश के नाम पर 700 करोड़ का डिजिटल जाल: वाराणसी पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर–हवाला गिरोह का किया भंडाफोड़, 13 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर–हवाला गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए लगभग 700 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को आईपीएल (IPL) में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का झांसा देकर देशभर में करीब दो लाख निवेशकों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस ने टकटतपुर इलाके के एक फ्लैट पर छापेमारी कर गिरोह के सरगना समेत कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित और परत-दर-परत तरीके से संचालित किया जा रहा था। शुरुआती चरण में लोगों को छोटे निवेश पर आकर्षक रिटर्न दिखाकर विश्वास जीता जाता था। जैसे ही निवेशकों का भरोसा मजबूत होता, उन्हें बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया जाता और फिर उनकी पूरी रकम हड़प ली जाती थी। इस पूरे खेल में ठगी गई राशि का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा एजेंट्स को कमीशन के रूप में दिया जाता था, जबकि मुख्य रकम गिरोह के शीर्ष संचालकों तक पहुंचती थी।

FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders

अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी के अनुसार, इस गिरोह का मास्टरमाइंड रितेश दिवाकर शुक्ला है, जो मुंबई के पालघर स्थित नालासोपारा का रहने वाला है और मूल रूप से वाराणसी के कपसेठी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम मुंबई स्थित एक फर्जी फर्म के माध्यम से आईपीएल निवेश के नाम पर एकत्र की जाती थी और बाद में उसे हवाला नेटवर्क के जरिए वाराणसी और लखनऊ तक पहुंचाया जाता था।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में काले धन को सफेद करने के लिए क्रिप्टो करेंसी और रियल एस्टेट का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा था। हाल ही में लखनऊ में करीब 75 लाख रुपये की जमीन की रजिस्ट्री भी इसी अवैध धन से कराई गई थी, जिसकी वास्तविक बाजार कीमत इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 17 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा क्रिप्टो वॉलेट्स में लगभग 1 करोड़ रुपये की डिजिटल संपत्ति भी पाई गई है, जिसे जब्त करने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस का मानना है कि यह केवल इस घोटाले का एक छोटा हिस्सा है और वास्तविक वित्तीय लेनदेन इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में शामिल अधिकांश आरोपी उच्च शिक्षित हैं। इनमें बीटेक, एमबीए, बीबीए और बीकॉम डिग्रीधारी युवा शामिल हैं। कुछ ने स्पोकन इंग्लिश और अन्य प्रोफेशनल कोर्स भी किए हैं। पुलिस के अनुसार, तेजी से अमीर बनने की लालसा और शॉर्टकट की मानसिकता ने इन युवाओं को संगठित अपराध की दुनिया में धकेल दिया।

गिरफ्तार आरोपियों में रितेश दिवाकर शुक्ला (सरगना), रवि यादव (चोलापुर), अर्पित तिवारी (सुल्तानपुर), अमन सिंह (फूलपुर), विकास पटेल (जौनपुर), जमालाहपुर निवासी (बिहार), सचिन सिंह उर्फ शैलेंद्र और गौरव चौहान (जयपुर), देवेश चौहान (जयपुर), अनिकेत कुमार (फतेहपुर), अमित तिवारी (जौनपुर), सौरभ चौहान (इटावा) और राहुल मौर्या (बहराइच) शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि यह गिरोह सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को टारगेट करता था। डिजिटल ट्रांजेक्शन और हवाला चैनलों के माध्यम से रकम को कई लेयर में घुमाकर ट्रेसिंग से बचाने की कोशिश की जाती थी।

इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराधी “सोशल इंजीनियरिंग” और भावनात्मक विश्वास का उपयोग कर बड़े पैमाने पर लोगों को फंसाते हैं। उनके अनुसार, “डिजिटल निवेश के नाम पर लालच और जल्द अमीर बनने की मानसिकता ही सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है, जिससे शिक्षित वर्ग भी आसानी से शिकार हो रहा है।”

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल साइबर फ्रॉड नहीं बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी, क्रिप्टो करेंसी और पारंपरिक हवाला सिस्टम का संयुक्त उपयोग किया गया है।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की फंड ट्रेल, डिजिटल फुटप्रिंट और संभावित विदेशी कनेक्शनों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे देश में फैले इस रैकेट की परतें पूरी तरह उजागर होंगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article