उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में डार्क रूम ऑपरेटर भर्ती में 29 अतिरिक्त जॉइनिंग और फर्जी दस्तावेजों के आरोपों की जांच तेज।

डार्क रूम ऑपरेटर भर्ती घोटाला: 29 अतिरिक्त जॉइनिंग और फर्जी दस्तावेजों से हड़कंप, 8 कर्मचारियों की गुपचुप सेवा समाप्त

Team The420
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में डार्क रूम ऑपरेटरों की भर्ती से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2016 में हुई इस भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों से अधिक लोगों को अवैध रूप से ज्वाइनिंग कराए जाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले के उजागर होने के बाद अब तक कम से कम आठ कर्मचारियों की सेवा गुपचुप तरीके से समाप्त की जा चुकी है या उनके इस्तीफे लिए गए हैं।

यह भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की गई थी, जिसमें कुल 355 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। हालांकि इनमें से केवल 337 अभ्यर्थियों ने ही वास्तव में जॉइनिंग दी थी। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कथित मिलीभगत के जरिए 29 अतिरिक्त लोगों को भी ज्वाइन करा दिया गया, जिनके दस्तावेज बाद में संदिग्ध और कई मामलों में फर्जी पाए गए।

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जांच में यह भी सामने आया है कि भर्ती प्रक्रिया में नाम, जन्मतिथि और पहचान संबंधी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया। कई मामलों में एक ही नाम और समान जन्मतिथि वाले अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग जिलों में नौकरी दे दी गई। फर्जी कागजात तैयार कर जिला स्तर से लेकर महानिदेशालय तक पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जैसे-जैसे शिकायतें बढ़ीं और चयन सूची की गहन जांच शुरू हुई, वैसे-वैसे फर्जी नियुक्तियों की परतें खुलती चली गईं। इसके बाद विभाग ने कई मामलों को सार्वजनिक किए बिना ही कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी या उनसे इस्तीफा ले लिया। कुछ मामलों में यह कार्रवाई बेहद चुपचाप तरीके से की गई।

इस पूरे मामले में सोनभद्र जिले में प्राथमिकी दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि आपराधिक पहलू से भी जुड़ा मामला है। अब जांच का दायरा अन्य जिलों तक बढ़ाया जा रहा है।

रिकॉर्ड की जांच में कई चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए हैं। “सुधीर कुमार” नाम के छह अलग-अलग अभ्यर्थियों के नौकरी पाने की बात सामने आई है। इसी तरह अन्य कई नामों के भी डुप्लीकेट रिकॉर्ड पाए गए हैं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

इसी प्रकार अवधेश कुमार पुत्र मेवालाल नाम के दो अभ्यर्थियों का मामला सामने आया है, जिनकी जन्मतिथि भी समान पाई गई। दोनों को हरदोई में तैनाती दी गई थी, जिनमें से एक को जांच में फर्जी पाए जाने पर सेवा से हटा दिया गया।

दिलीप सिंह पुत्र मोहन सिंह के नाम से भी दो अभ्यर्थियों के मामले सामने आए हैं, जिन्हें एक ही स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात किया गया था। जांच में गड़बड़ी मिलने पर एक की सेवा समाप्त कर दी गई। वहीं गिर्राज सिंह और जगदीश प्रसाद के नाम से भी डुप्लीकेट नियुक्तियों के मामले सामने आए हैं, जिनमें समान जन्मतिथि और मिलते-जुलते दस्तावेज पाए गए।

इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रणाली, दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल नियुक्तियों की गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित स्तर पर की गई अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।

फिलहाल विभागीय स्तर पर पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा जारी है और अन्य संदिग्ध नियुक्तियों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस भर्ती घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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