तिरुपति। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़े ₹1.19 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में आईटी और HRD मंत्री नारा लोकेश के हस्तक्षेप के बाद जांच प्रक्रिया को और गति मिल गई है। यह मामला DWCRA (Development of Women and Children in Rural Areas) से जुड़ी निधियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित है।
यह शिकायत सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आई, जहां सरन्या पेमासानी नामक यूजर ने मंत्री नारा लोकेश को टैग करते हुए आरोप लगाया कि आरपी (Responsible Person) नुहीर ने दीपिका SLF DWCRA सदस्यों के ₹1.19 करोड़ की राशि का गबन किया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि 2022 से 2025 के बीच यह रकम धीरे-धीरे स्थानांतरित की गई और शिकायतों के बावजूद बैंक अधिकारियों तथा MEPMA कर्मचारियों की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई।
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शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मंत्री नारा लोकेश ने संबंधित पोस्ट को री-शेयर करते हुए प्रशासन को तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने तिरुपति पुलिस से बिना देरी के मामले की जांच करने और जिम्मेदारी तय करने को कहा। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी आई और स्थानीय पुलिस ने पुष्टि की कि इस मामले में पहले से ही FIR दर्ज की जा चुकी है।
तिरुपति पुलिस के अनुसार, ईस्ट पुलिस स्टेशन में अपराध संख्या 577/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, लाभार्थी खातों और लेनदेन के विवरण की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित फंड हेराफेरी कैसे और किन परिस्थितियों में हुई।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह मामला महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए निर्धारित सरकारी योजनाओं की राशि के व्यवस्थित दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि इसमें किसी प्रकार की आंतरिक लापरवाही, बैंकिंग अनियमितता या प्रशासनिक पहुंच का दुरुपयोग शामिल था या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित SHG सदस्यों और प्रशासनिक कर्मियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बैंकिंग लेनदेन और ऑडिट रिपोर्ट की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि धन के प्रवाह को स्पष्ट रूप से ट्रेस किया जा सके।
इस शिकायत ने DWCRA और अन्य महिला सशक्तिकरण योजनाओं की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपों में यह भी कहा गया है कि शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई और विभागीय समन्वय में कमी रही।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच का फोकस सभी संभावित जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान पर होगा, जिसमें किसी भी मध्यस्थ या संस्थागत भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों को एकत्र किया जा रहा है।
मंत्री नारा लोकेश के हस्तक्षेप के बाद इस मामले को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर बढ़ गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
फिलहाल यह मामला ग्रामीण महिलाओं के लिए निर्धारित कल्याणकारी निधियों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत निगरानी और रियल-टाइम ऑडिट सिस्टम की आवश्यकता है।
जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
