लखनऊ पुलिस ने फर्जी कंपनियां बनाकर बैंक खाते खोलने और साइबर ठगी की रकम खपाने वाले चार कथित म्यूल अकाउंट ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया।

विदेशी पासपोर्ट, उंगली पर स्याही और फर्जी वोटिंग का शक: तमिलनाडु चुनाव के बाद 25 विदेशी नागरिक हिरासत में

Team The420
5 Min Read

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बाद कथित फर्जी मतदान को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों ने अब तक लगभग 25 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है, जिन पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और गलत पहचान के आधार पर मतदान करने का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार कई संदिग्धों के पास विदेशी पासपोर्ट मिले, जबकि उनकी उंगलियों पर मतदान के दौरान लगाई जाने वाली अमिट स्याही के निशान पाए गए।

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई पिछले करीब एक सप्ताह से चल रही है। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान के तहत चेन्नई, मदुरै और अन्य एयरपोर्ट्स पर निगरानी बढ़ाई थी। एजेंसियों को खुफिया सूचना मिली थी कि कुछ विदेशी नागरिक मतदान के बाद देश छोड़ने की तैयारी में हैं। इसी आधार पर एयरपोर्ट्स पर दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई।

जांच एजेंसियों का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों में बड़ी संख्या श्रीलंकाई नागरिकों की है, जबकि कुछ के पास ब्रिटेन और कनाडा की नागरिकता भी पाई गई। अधिकारियों के अनुसार कई संदिग्ध चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद तमिलनाडु पहुंचे थे। आशंका है कि कुछ लोग मतदान के बाद जानबूझकर कुछ दिन तक राज्य में रुके रहे ताकि उंगली पर लगा अमिट स्याही का निशान हल्का हो जाए और जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

मामले में सबसे चर्चित घटनाओं में एक भारतीय मूल के ऐसे व्यक्ति की पहचान शामिल है जिसने वर्ष 2015 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल की थी। आरोप है कि उसने पट्टुकोट्टई विधानसभा क्षेत्र में मतदान किया। बाद में चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर लंदन जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से पहले उसे रोक लिया गया। जांच में उसके पास विदेशी पासपोर्ट और भारतीय चुनावी पहचान से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर फर्जी पते, पुराने भारतीय दस्तावेजों और गलत पहचान का इस्तेमाल कर मतदाता सूची में नाम बरकरार रखा। अधिकारियों को संदेह है कि ऐसे कई विदेशी नागरिक अब भी देश में मौजूद हो सकते हैं जिन्होंने मतदान किया लेकिन अभी तक विदेश रवाना नहीं हुए हैं।

जांच एजेंसियां अब इमिग्रेशन रिकॉर्ड, एयर ट्रैवल डेटा, मतदाता सूची, EPIC कार्ड और डिजिटल एंट्री रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में डिजिटल ट्रैकिंग और यात्रा इतिहास से यह पुष्टि की जा सकती है कि संबंधित व्यक्ति मतदान अवधि के दौरान भारत में मौजूद थे।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। जांच एजेंसियों ने चुनाव आयोग को भी विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। हालांकि अधिकारियों ने यह टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इन कथित फर्जी वोटों का चुनाव परिणामों पर कितना असर पड़ा हो सकता है।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025 में भी इमिग्रेशन अधिकारियों ने विदेशी नागरिकता हासिल कर चुके करीब 100 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध किया था। दस्तावेज सत्यापन के दौरान पाया गया था कि कई लोगों के पास विदेशी पासपोर्ट होने के बावजूद भारतीय मतदाता पहचान पत्र मौजूद थे। इस वर्ष भी लगभग 60 विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।

चुनाव नियमों के तहत केवल भारतीय नागरिक ही “ओवरसीज इलेक्टर” के रूप में मतदान के पात्र होते हैं। यदि किसी व्यक्ति ने किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार कर ली है, तो वह भारत में मतदान का अधिकार खो देता है। एनआरआई मतदाताओं को भी मतदान के समय मूल भारतीय पासपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

प्रख्यात साइबर एवं पहचान धोखाधड़ी विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार पहचान आधारित चुनावी धोखाधड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उनके मुताबिक डिजिटल सत्यापन, नागरिकता रिकॉर्ड और चुनावी डेटा के बीच बेहतर समन्वय के बिना ऐसे मामलों को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article