चंडीगढ़। पंजाब में कथित भूमि घोटाले और फर्जी दस्तावेजों के जरिए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा तेज कर दिया है। जांच एजेंसी अब पंजाब के कई वरिष्ठ अधिकारियों, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से जुड़े पदाधिकारियों और रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कर रही है। मामला न्यू चंडीगढ़ स्थित बहुचर्चित “संटेक सिटी” परियोजना से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें किसानों की जमीन से संबंधित कथित फर्जी सहमति पत्रों का इस्तेमाल कर Change of Land Use (CLU) अनुमति हासिल करने का आरोप है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ED ने हाल ही में ज्वेलर से रियल एस्टेट कारोबारी बने अजय सहगल को गिरफ्तार किया है। वह इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी और संबंधित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि परियोजना के लिए किसानों और जमीन मालिकों की सहमति दिखाने हेतु फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, जिनमें कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर और नकली अंगूठे के निशान इस्तेमाल किए गए।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 15 भूमि मालिकों की लगभग 30.5 एकड़ जमीन से जुड़े सहमति पत्र कथित रूप से फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए CLU मंजूरी हासिल की गई। ED का मानना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल भूमि धोखाधड़ी तक सीमित न रहकर संगठित आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग का रूप ले सकता है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA), टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग तथा हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के बावजूद परियोजना को मंजूरी कैसे दी गई और निगरानी तंत्र में कहां चूक हुई।
मामले में राजनीतिक कनेक्शन की आशंका भी जताई जा रही है। जांच एजेंसियों के सूत्रों का दावा है कि विभिन्न सरकारों के दौरान प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक व्यक्तियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी राजनीतिक नेता का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ED कथित तौर पर उन रियल एस्टेट परियोजनाओं की भी जांच कर रही है, जहां पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट (PRTPD) कानून के तहत सख्त कार्रवाई के बजाय केवल आंशिक CLU रद्द किए गए। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ मामलों में बिल्डरों को शेष इन्वेंट्री बेचने और व्यावसायिक हित सुरक्षित रखने का अवसर देने के लिए सीमित कार्रवाई की गई।
जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि कई कथित उल्लंघनों के बावजूद पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट (PAPRA), 1995 के तहत FIR दर्ज नहीं की गईं। ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या नियामकीय कार्रवाई में जानबूझकर नरमी बरती गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या कुछ प्रभावशाली लोगों ने पहले दर्ज FIR को रद्द करवाने की कोशिश की थी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मूल FIR निरस्त हो जाती, तो मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर भी असर पड़ सकता था, क्योंकि PMLA मामलों में मूल आपराधिक मामला ही जांच का आधार होता है।
भूमि और वित्तीय अपराध मामलों के जानकारों का कहना है कि बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में फर्जी सहमति पत्र, नकली पावर ऑफ अटॉर्नी और जाली भूमि रिकॉर्ड का इस्तेमाल हाल के वर्षों में गंभीर चिंता का विषय बनकर उभरा है। कई मामलों में किसानों और जमीन मालिकों को वर्षों बाद पता चलता है कि उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर बिना जानकारी के इस्तेमाल किए गए।
प्रसिद्ध साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, भूमि और रियल एस्टेट धोखाधड़ी अब केवल दस्तावेजी अपराध नहीं रह गई है, बल्कि यह संगठित आर्थिक नेटवर्क का हिस्सा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े भूमि सौदे से पहले रिकॉर्ड सत्यापन, राजस्व अभिलेखों की जांच और कानूनी प्रमाणीकरण बेहद जरूरी है। ED फिलहाल बैंकिंग ट्रेल, दस्तावेजी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।
