झारखंड में सरकारी ट्रेजरी से फर्जी वेतन भुगतान और संदिग्ध निकासी के मामले में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज की।

फर्जी दस्तावेज, नकली ट्रस्ट और करोड़ों की जमीनें: SRMF भूमि घोटाले में ED की बड़ी रेड, दो मास्टरमाइंड जांच के घेरे में

Team The420
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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMF) की कथित जमीन धोखाधड़ी से जुड़े बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेज, नकली बोर्ड प्रस्ताव, जाली मुहरों और फर्जी प्रतिनिधियों के जरिए देशभर में फैली संस्थागत जमीनों की अवैध बिक्री से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ईडी अधिकारियों के मुताबिक एजेंसी ने 7 मई 2026 को प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज करने के बाद जांच तेज की थी। प्रारंभिक जांच में जी. राम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख संचालक और मास्टरमाइंड माना गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूर्व में भी एक मामले में गिरफ्तारी के बावजूद कथित गतिविधियां जारी रहीं और नेटवर्क लगातार नई संपत्तियों के सौदे करता रहा।

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जांच के तहत दिल्ली के नारायण विहार स्थित एक आवास, नोएडा सेक्टर-100 में सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर, सेक्टर-105 में कंपनी निदेशक के पते तथा अन्य संबंधित परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया। एजेंसियों को संदेह है कि इन परिसरों से भूमि सौदों, फर्जी दस्तावेजों और धन के लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

ईडी के अनुसार SRMF एक पंजीकृत संस्था है, जिसकी स्थापना 1963 में हुई थी और जिसके पास कई राज्यों में बड़ी मात्रा में अचल संपत्तियां मौजूद हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने संस्था के नाम से मिलते-जुलते नाम वाली फर्जी इकाइयां बनाकर जमीनों पर कब्जे और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर नकली अथॉरिटी लेटर, जाली बोर्ड रेजोल्यूशन और फर्जी सील तैयार कर जमीनों को वैध दिखाने की कोशिश की गई।

मामले का सबसे चर्चित हिस्सा नोएडा की एक प्राइम जमीन से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार दिसंबर 2025 में गेजा तिलपताबाद गांव स्थित लगभग 3.36 हेक्टेयर जमीन, जिसकी सर्किल रेट कीमत करीब ₹33.61 करोड़ बताई गई, कथित रूप से केवल ₹16 करोड़ में बेची गई। आरोप है कि इस सौदे में संस्था के नाम से मिलती-जुलती एक फर्जी इकाई का इस्तेमाल किया गया ताकि खरीदारों और रजिस्ट्री प्रक्रिया को भ्रमित किया जा सके।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही संपत्ति को अलग-अलग खरीदारों को दोबारा बेचने के आरोप हैं। एजेंसियों का कहना है कि इसी प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कई राज्यों में संगठित नेटवर्क सक्रिय था। अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कम से कम सात FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें नोएडा, धार, शाजापुर और बिलासपुर से जुड़े कथित फर्जी बिक्री मामलों की जांच चल रही है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक कुछ मामलों में राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजी प्रक्रियाओं में भी गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। अधिकारियों को संदेह है कि इस नेटवर्क ने वर्षों तक कानूनी प्रक्रियाओं की कमजोरियों और दस्तावेज सत्यापन की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की संपत्तियों का अवैध हस्तांतरण किया।

महत्वपूर्ण आर्थिक अपराध मामलों में जांच एजेंसियां अब मनी ट्रेल, शेल कंपनियों और संभावित बेनामी निवेश की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार जमीन बिक्री से प्राप्त रकम को कई खातों और कंपनियों के जरिए घुमाने के संकेत मिले हैं, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू मजबूत हुए हैं।

प्रख्यात साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि संगठित आर्थिक अपराध अब केवल डिजिटल फ्रॉड तक सीमित नहीं रहे, बल्कि भूमि, ट्रस्ट और संस्थागत संपत्तियों तक फैल चुके हैं। उनके मुताबिक फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों के जरिए संपत्ति हस्तांतरण देश में तेजी से उभरता हुआ आर्थिक अपराध मॉडल बनता जा रहा है।

ईडी की कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों, संभावित वित्तीय लाभार्थियों और कथित संरक्षण तंत्र की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

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