तिरुपति। आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध श्रीशैलम तीर्थ क्षेत्र में ऑनलाइन बुकिंग धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें दिल्ली से आए 27 श्रद्धालु फर्जी होटल वेबसाइट के झांसे में आकर बिना आवास के फंस गए। श्रद्धालुओं ने धार्मिक यात्रा के लिए पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग कर भुगतान किया था, लेकिन मौके पर पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर कोई कमरा आरक्षित ही नहीं था।
श्रद्धालुओं ने धार्मिक यात्रा के लिए पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग कर भुगतान किया था, लेकिन मौके पर पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर कोई कमरा आरक्षित ही नहीं था। जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं ने कुल नौ एसी कमरों की बुकिंग की थी और इसके लिए लगभग ₹15,000 का भुगतान UPI के माध्यम से किया गया था। बुकिंग के बाद सभी यात्रियों को कन्फर्मेशन मैसेज और रसीद भी प्राप्त हुई थी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की शंका नहीं हुई।
लेकिन जब वे श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन सदन पहुंचे तो वहां के कर्मचारियों ने साफ बताया कि उनके नाम पर कोई भी बुकिंग दर्ज नहीं है। इस खुलासे के बाद यात्रियों में हड़कंप मच गया और पूरे समूह को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने अपने मोबाइल फोन में मौजूद बुकिंग दस्तावेज और स्क्रीनशॉट दिखाए, लेकिन होटल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह बुकिंग किसी अधिकृत प्लेटफॉर्म के जरिए नहीं हुई है और संभवतः फर्जी वेबसाइट के माध्यम से किया गया साइबर फ्रॉड है।
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घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया और स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाए। मंदिर प्रशासन की मदद से सभी 27 श्रद्धालुओं को अस्थायी रूप से निःशुल्क आवास उपलब्ध कराया गया और उनके लिए दर्शन की विशेष व्यवस्था भी की गई, ताकि उनकी धार्मिक यात्रा बाधित न हो।
श्रीशैलम मंदिर भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी को समर्पित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह मंदिर नल्लामाला पहाड़ियों में कृष्णा नदी के किनारे स्थित है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस स्थान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक माना जाता है।
इस घटना के बाद श्रद्धालुओं ने अन्य यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन बुकिंग वेबसाइट पर भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पूरी जांच करें। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी नकली डोमेन और सोशल मीडिया विज्ञापनों का सहारा लेते हैं। ये वेबसाइटें अक्सर सस्ते पैकेज और आसान बुकिंग का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाती हैं।
एक बार भुगतान होने के बाद संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी धार्मिक या पर्यटन यात्रा की बुकिंग केवल आधिकारिक और सत्यापित पोर्टल से ही की जाए। साथ ही, किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजान विज्ञापन पर क्लिक करने से पहले पूरी जांच आवश्यक है।
इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। डिजिटल भुगतान और इंटरनेट बुकिंग की बढ़ती सुविधा के साथ साइबर अपराध भी तेजी से फैल रहे हैं जिससे आम लोग आसानी से शिकार बन रहे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और संबंधित डिजिटल ट्रांजैक्शन व वेबसाइट के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों तक पहुंचकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अंत में यह घटना लोगों के लिए एक बड़ा सबक है कि डिजिटल युग में सुविधा के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है अन्यथा छोटी सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बन सकती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत दर्ज कराना और डिजिटल लेनदेन के सभी प्रमाण सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी संदिग्ध वेबसाइट की जानकारी राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन या बैंक के कस्टमर केयर के माध्यम से तुरंत सत्यापित की जाए। साथ ही, लोगों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले केवल सरकारी या अधिकृत पोर्टल का उपयोग करें और सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें क्योंकि यही सबसे बड़ा जोखिम बन चुका है।
