लंदन। ब्रिटेन में एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर हजारों साल पुरानी प्राचीन मूर्तियों को असली बताकर करोड़ों रुपये में बेचने की कोशिश का मामला सामने आया है। मशहूर ऑक्शन हाउस Sotheby’s ने जब मूर्तियों के साथ दिए गए दस्तावेजों की जांच कराई, तो पता चला कि वे कागजात नकली थे और आधुनिक प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किए गए थे। इसके बाद पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए दो साल की सस्पेंडेड जेल सजा सुनाई है।
ब्रिस्टल के लॉन्गवेल ग्रीन निवासी 46 वर्षीय एंड्रयू क्रॉवली ने नवंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच चार दुर्लभ प्राचीन मूर्तियों को Sotheby’s के जरिए बेचने की कोशिश की थी। इनमें तीन Cycladic figures और एक Anatolian Stargazer statuette शामिल थी। आरोपी का दावा था कि ये मूर्तियां उसे उसके दादा से विरासत में मिली थीं और वे करीब 3000 साल पुरानी हैं।
अदालत में बताया गया कि यदि ये मूर्तियां वास्तव में असली होतीं, तो उनकी कुल कीमत लगभग 6.8 लाख पाउंड यानी करीब ₹7.7 करोड़ हो सकती थी। हालांकि सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि यह मूल्य कई अनुमानों पर आधारित था, इसलिए संभावित मूल्य को घटाकर 3.4 लाख पाउंड यानी लगभग ₹3.85 करोड़ माना गया।
FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort
मामले की सबसे अहम कड़ी वे दस्तावेज बने, जिन्हें आरोपी ने मूर्तियों की प्रामाणिकता साबित करने के लिए पेश किया था। इन कागजात में कथित तौर पर 1976 के पुराने इनवॉइस, टाइपराइटर से टाइप किए गए पत्र, एंटीक डीलर के एम्बॉस्ड लोगो और यहां तक कि नौ पेंस का पुराना डाक टिकट भी शामिल था। पहली नजर में दस्तावेज पुराने दिखाने की कोशिश की गई थी, लेकिन फोरेंसिक जांच में पता चला कि उनकी प्रिंटिंग ऐसी तकनीक से हुई थी जिसका आविष्कार वर्ष 2001 में हुआ था।
जांच के दौरान Sotheby’s के विशेषज्ञों ने दस्तावेजों में कई स्पेलिंग मिस्टेक्स भी पकड़ीं। अदालत में जज निकोलस रिमर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “काफी भद्दा प्रयास” था और Sotheby’s ने शुरुआती स्तर पर ही दस्तावेजों को संदिग्ध मान लिया था।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि एंड्रयू क्रॉवली को संभवतः यह विश्वास था कि मूर्तियां असली हैं। जज ने कहा कि आरोपी ने शायद कभी यह नहीं सोचा कि मूर्तियां नकली हो सकती हैं, इसलिए इस मामले में असली अपराध नकली दस्तावेज तैयार करना और उनका इस्तेमाल करना था।
पुलिस के अनुसार, Cycladic मूर्तियां करीब 30 सेंटीमीटर लंबी और लगभग एक किलो वजनी थीं। वास्तविक Cycladic मूर्तियां यूनान के Cyclades द्वीप समूह में ब्रॉन्ज एज के दौरान बनाई जाती थीं और कला बाजार में उनकी काफी ऊंची कीमत मानी जाती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय नीलामी बाजार में ऐसी वस्तुओं की प्रामाणिकता की जांच बेहद सख्ती से की जाती है।
मामले में आरोपी ने अदालत में “dishonestly making a false representation intending to make gain” यानी लाभ कमाने के उद्देश्य से झूठा प्रतिनिधित्व करने का अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद साउथवार्क क्राउन कोर्ट ने उसे दो साल की सस्पेंडेड सजा सुनाई। इसके अलावा 200 घंटे की बिना वेतन सामुदायिक सेवा और 1,630 पाउंड यानी करीब ₹1.85 लाख खर्च के रूप में जमा कराने का आदेश भी दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कला और एंटीक बाजार में नकली दस्तावेजों और फर्जी provenance papers के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं। कई मामलों में असली दिखने वाले पुराने कागजात, फर्जी मुहरें और नकली खरीद रिकॉर्ड तैयार कर दुर्लभ कलाकृतियों को वैध साबित करने की कोशिश की जाती है।
