सिरोही जिले में हाईटेक तरीके से की गई पहचान आधारित ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक संगठित गिरोह ने फर्जी पहचान बनाकर एक व्यक्ति से करीब ₹16 लाख की धोखाधड़ी कर ली। कालंद्री पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य संभावित नेटवर्क और गुजरात कनेक्शन की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार यह मामला लगभग एक महीने पुराना है, जब पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को ‘प्रतापभाई’ बताकर एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया और सुनियोजित तरीके से उसे झांसे में लेकर ₹16 लाख की ठगी कर ली। शुरुआती जांच में यह एक सामान्य धोखाधड़ी का मामला प्रतीत हुआ, लेकिन तकनीकी विश्लेषण के बाद इसके पीछे एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ।
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जांच के दौरान पुलिस के पास सबसे पहले केवल एक मोबाइल नंबर और कुछ डिजिटल सुराग थे। इसी आधार पर साइबर और तकनीकी टीम ने कॉल डिटेल्स, लोकेशन ट्रेसिंग और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की गहन जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क के तार राजस्थान के साथ-साथ गुजरात के सूरत शहर से भी जुड़े हुए हैं।
लगातार 6 से 7 दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर दबिश देने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें मुंडारा निवासी जितेंद्र उर्फ जीतू पुत्र अशोक कुमार सिसोदिया, खुडाला-फालना निवासी इंद्रसिंह पुत्र जुहारसिंह राजपुरोहित और सूरत निवासी रूपलबेन पत्नी हिम्मतभाई शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और हर सदस्य की भूमिका तय थी।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लोगों को निशाना बनाने के लिए “इम्पर्सोनेशन तकनीक” का इस्तेमाल करते थे, जिसमें खुद को प्रभावशाली या भरोसेमंद व्यक्ति बताकर पीड़ितों को मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता था। इसके बाद उन्हें निवेश, लेन-देन या अन्य बहाने से पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह केवल एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह के सदस्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर बैंकिंग ट्रांजैक्शन और पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते थे।
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं, जिसके आधार पर अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरह की धोखाधड़ी अन्य जिलों या राज्यों में भी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में “हाईटेक पहचान धोखाधड़ी” तेजी से बढ़ रही है, जहां अपराधी किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या भरोसेमंद नाम का उपयोग करके लोगों को ठगते हैं। तकनीकी जागरूकता की कमी और भरोसे के कारण लोग आसानी से ऐसे जाल में फंस जाते हैं।
इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ वित्तीय लेन-देन से पहले पूरी तरह सत्यापन करें और संदिग्ध कॉल, मैसेज या पहचान पर तुरंत विश्वास न करें। साथ ही डिजिटल ट्रांजैक्शन में सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले के बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल फुटप्रिंट और अंतरराज्यीय कनेक्शन की गहन जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया है और इसके पीछे और कौन-कौन शामिल हैं।
