कानपुर में राजनीतिक फंड और कमीशन का झांसा देकर स्कूल संचालक दंपती के खातों का इस्तेमाल ₹1.09 करोड़ की साइबर ठगी में किए जाने का मामला सामने आया है।

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी का बड़ा खेल: सीकर में ₹15.82 लाख फ्रॉड का खुलासा, चेक से ₹14.90 लाख निकाले गए

Team The420
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सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में साइबर ठगी से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय मामला सामने आया है, जिसमें दो आरोपियों के बैंक खातों में करीब ₹15.82 लाख की ठगी की रकम ट्रांसफर की गई और बाद में उसमें से ₹14.90 लाख चेक के माध्यम से निकाल लिए गए। इस मामले ने साइबर फ्रॉड नेटवर्क के म्यूल अकाउंट सिस्टम की परतें खोल दी हैं।

साइबर थाना पुलिस ने इस पूरे मामले को “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत दर्ज किया है और दोनों आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों की पहचान श्यामपुरा निवासी विकास कुमार और रामलीला मैदान निवासी मनमोहन सिंह राठौड़ के रूप में हुई है।

साइबर थाने के डीएसपी जीवनलाल खत्री के अनुसार, स्टेट साइबर क्राइम विंग से मिले इनपुट के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने “श्याम इंटरप्राइजेज” नाम की फर्म के जरिए यूको बैंक की घंटाघर शाखा में एक करंट अकाउंट खुलवाया था, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को घुमाने के लिए किया जा रहा था।

जांच में पता चला कि यह रकम तमिलनाडु के दो अलग-अलग जिलों से जुड़े साइबर फ्रॉड मामलों से आई थी। पहला मामला इरोड जिले का है, जहां 19 जनवरी 2026 को पीड़ित के खाते से ₹5 लाख ट्रांसफर होकर आरोपियों के करंट अकाउंट में पहुंचे। हैरानी की बात यह रही कि उसी दिन यह पूरी रकम चेक के माध्यम से निकाल ली गई।

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दूसरा मामला नमक्कल जिले से जुड़ा है, जहां 20 जनवरी को पीड़ित के खाते से ₹10.82 लाख (₹10,82,450) आरोपियों के खाते में ट्रांसफर किए गए। इसी दिन आरोपियों ने इस रकम में से ₹9.90 लाख निकाल लिए। इस तरह कुल मिलाकर ₹15.82 लाख की साइबर ठगी की राशि उनके खाते में आई, जिसमें से अधिकांश रकम तुरंत कैश कर ली गई।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह कोई साधारण बैंकिंग लेन-देन नहीं था, बल्कि एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा था। आरोपियों ने बैंक खाता खुलवाकर उसे म्यूल अकाउंट की तरह इस्तेमाल किया, जहां ठगी की रकम को जमा कर तुरंत निकाल लिया जाता था ताकि ट्रांजैक्शन ट्रेल को छुपाया जा सके।

डीएसपी जीवनलाल खत्री ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि दोनों आरोपी किसी साइबर फ्रॉड गिरोह से जुड़े हो सकते हैं, जो देशभर में अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है। यह गिरोह फर्जी पहचान और बैंक खातों का इस्तेमाल कर अवैध धन को घुमाने का काम करता है।

जांच एजेंसियां अब बैंक रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर और लेन-देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि खाते खोलने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी की यह संरचना बेहद संगठित है, जिसमें अलग-अलग लोग अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं—कुछ लोग पीड़ितों से पैसा ठगते हैं, जबकि कुछ लोग उसे म्यूल अकाउंट के जरिए निकालकर आगे ट्रांसफर करते हैं।

फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य खातों और लोगों की पहचान भी जल्द की जा सकती है। यह मामला एक बार फिर साइबर ठगी के बढ़ते नेटवर्क और बैंकिंग सिस्टम में म्यूल अकाउंट के दुरुपयोग की गंभीरता को उजागर करता है।

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