OMS बिजनेस ट्रांसफर, कथित फंड रूटिंग और वित्तीय विवरणों में अनियमितताओं को लेकर SEBI ने Suzlon Energy और पूर्व अधिकारियों पर ₹29 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया।

“पुराने सौदों की नई जांच”: OMS ट्रांजैक्शन मामले में SEBI का बड़ा एक्शन, Suzlon Energy और पूर्व अधिकारियों पर ₹29 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना

Team The420
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नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने विंड एनर्जी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Suzlon Energy और उसके पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों पर कुल ₹29 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। मामला कंपनी के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस सर्विस (OMS) बिजनेस के ट्रांसफर, वित्तीय विवरणों में कथित गड़बड़ियों और संबंधित पक्षों के लेन-देन से जुड़ा है। SEBI के आदेश के बाद बाजार में इस कार्रवाई को कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नियामक के आदेश के अनुसार कंपनी पर ₹15.95 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा पूर्व एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन विनोद आर. तांती पर ₹5.75 करोड़, गिरीश आर. तांती पर ₹5.45 करोड़, पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी कीर्ति जे. वगाडिया पर ₹1.5 करोड़ और अमित अग्रवाल पर ₹30 लाख का दंड लगाया गया है। कुल मिलाकर विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों पर लगाया गया जुर्माना ₹29 करोड़ से अधिक पहुंच गया है।

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SEBI के मुताबिक यह मामला दिसंबर 2019 में मिली एक गुमनाम शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत को प्रारंभिक जांच के लिए National Stock Exchange (NSE) को भेजा गया, जहां निवेश, ऋण, इम्पेयरमेंट, संबंधित पक्षों के खुलासे और संभावित नियामकीय उल्लंघनों से जुड़े मुद्दों की पहचान हुई। इसके बाद नियामक ने वित्त वर्ष 2014-15 से 2019-20 और वित्त वर्ष 2020-21 की शुरुआती तीन तिमाहियों तक की विस्तृत जांच शुरू की।

जांच में मुख्य फोकस 29 मार्च 2014 को हुए उस स्लंप सेल ट्रांजैक्शन पर रहा, जिसमें Suzlon Energy ने अपना OMS बिजनेस अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Suzlon Global Services Ltd को ट्रांसफर किया था। यह सौदा ₹2,000 करोड़ में दिखाया गया, जबकि संबंधित व्यवसाय का घोषित मूल्य करीब ₹77.08 करोड़ बताया गया था। SEBI के अनुसार इस ट्रांजैक्शन के आधार पर कंपनी ने वित्त वर्ष 2013-14 में लगभग ₹1,922.92 करोड़ का असाधारण लाभ दर्ज किया।

नियामक ने यह भी पाया कि बिक्री राशि में से ₹1,300 करोड़ का भुगतान निर्धारित 90 दिनों की अवधि में प्राप्त नहीं हुआ। जांच में आरोप लगाया गया कि मार्च 2017 के दौरान कुछ फंड्स को Suzlon Energy और Suzlon Global Services Ltd के बैंक खातों के बीच बार-बार घुमाकर लेन-देन पूरा दिखाने की कोशिश की गई। SEBI ने इसे संभावित सर्कुलर ट्रांजैक्शन के रूप में दर्ज किया है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि OMS बिजनेस ट्रांसफर के बाद Suzlon Global Services Ltd की एसेट बेस में अचानक बड़ा विस्तार दिखाई दिया, जबकि पहले उसके संचालन सीमित थे। बाद में वित्त वर्ष 2015-16 में इसी इकाई की हिस्सेदारी Suzlon Structures Ltd को ₹927.83 करोड़ में बेची गई, जिससे अतिरिक्त ₹829.78 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया। SEBI के अनुसार OMS से जुड़े लाभ को अलग-अलग वित्तीय वर्षों में दोबारा दर्ज किए जाने के संकेत मिले।

जांच के दौरान नियामक ने यह भी कहा कि यदि इन ट्रांजैक्शनों से उत्पन्न लाभ को अलग कर दिया जाए तो कंपनी की नेटवर्थ स्थिति काफी कमजोर दिखाई देती। आदेश में वित्त वर्ष 2014-15 में ₹6,026 करोड़ के इम्पेयरमेंट और बाद के वर्षों में इक्विटी इश्यू तथा पुनर्गठन प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है।

SEBI ने मामले में PFUTP नियमों, LODR प्रावधानों, लिस्टिंग एग्रीमेंट और SEBI Act के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कार्रवाई की है। नियामक के अनुसार यह आदेश पहले के एक अधिनिर्णय आदेश को निरस्त करने के बाद पारित किया गया, जिसमें उल्लंघनों की पुष्टि करते हुए संशोधित दंड निर्धारित किया गया।

कार्रवाई के बाद बाजार में कंपनी के शेयरों पर भी असर दिखाई दिया। शुक्रवार को NSE पर Suzlon Energy का शेयर लगभग 0.54 प्रतिशत गिरकर ₹56.99 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सूचीबद्ध कंपनियों में संबंधित पक्षों के लेन-देन, फंड फ्लो और वित्तीय रिपोर्टिंग की निगरानी को लेकर SEBI के सख्त रुख को दर्शाता है।

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