SBI ग्राहकों को YONO App बंद होने और Aadhaar अपडेट के नाम पर फर्जी APK लिंक भेजकर बैंकिंग डिटेल्स चुराने की कोशिश की जा रही है।

“YONO App बंद होने” के नाम पर नया साइबर जाल: SBI ग्राहकों को फर्जी मैसेज भेजकर बैंकिंग डिटेल्स चुराने की साजिश

Team The420
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नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI के ग्राहकों को निशाना बनाकर एक नया और बेहद खतरनाक साइबर फ्रॉड अभियान चलाया जा रहा है। साइबर अपराधी फर्जी संदेश भेजकर लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका YONO बैंकिंग ऐप जल्द ही बंद या डिएक्टिवेट हो जाएगा, यदि उन्होंने तुरंत अपना Aadhaar अपडेट नहीं किया। इस बहाने ग्राहकों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या नकली APK फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाया जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह एक संगठित “स्मिशिंग” और मोबाइल मालवेयर अटैक है, जिसमें अपराधी डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर लोगों से गलती करवाते हैं। यह फर्जी संदेश SMS, WhatsApp और ईमेल के जरिए भेजे जा रहे हैं। मैसेज की भाषा इतनी आधिकारिक और विश्वसनीय बनाई जाती है कि सामान्य उपयोगकर्ता आसानी से धोखे में आ सकते हैं।

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SBI ने इस अभियान को लेकर आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए साफ कहा है कि बैंक कभी भी ग्राहकों से APK फाइल डाउनलोड करने, संदिग्ध लिंक खोलने या मैसेज के जरिए Aadhaar अपडेट करने के लिए नहीं कहता। बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे केवल Google Play Store या Apple App Store से ही YONO ऐप डाउनलोड करें।

जांच में सामने आया है कि फर्जी संदेशों में दावा किया जाता है कि यदि उपयोगकर्ता तुरंत Aadhaar अपडेट नहीं करेंगे तो उनका YONO अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसके साथ एक लिंक या APK फाइल भेजी जाती है। जैसे ही उपयोगकर्ता इस फाइल को इंस्टॉल करता है, साइबर अपराधियों को मोबाइल डिवाइस पर व्यापक एक्सेस मिल सकता है। इसके जरिए वे OTP पढ़ सकते हैं, बैंकिंग गतिविधियों की निगरानी कर सकते हैं और यहां तक कि डिवाइस को रिमोट तरीके से नियंत्रित भी कर सकते हैं।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि नकली ऐप्स को असली YONO इंटरफेस जैसा बनाया जाता है, जिससे उपयोगकर्ता को तुरंत शक नहीं होता। यह तकनीक “फेक बैंकिंग ऐप ओवरले अटैक” के रूप में जानी जाती है और हाल के वर्षों में भारत में तेजी से बढ़ी है। अपराधी अब पारंपरिक फिशिंग से आगे बढ़कर मोबाइल आधारित मालवेयर हमलों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब लोगों की डिजिटल निर्भरता और बैंकिंग जागरूकता की कमी का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि Aadhaar लिंकिंग जैसे संवेदनशील विषयों का इस्तेमाल जानबूझकर किया जाता है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी बैंकिंग अपडेट और KYC प्रक्रियाओं को लेकर भ्रमित रहते हैं। उनके मुताबिक, किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या मैसेज के जरिए भेजे गए बैंकिंग निर्देशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

भारत सरकार की PIB Fact Check इकाई ने भी ऐसे संदेशों को फर्जी बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी ने कहा कि यह संदेश ग्राहकों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चुराने के उद्देश्य से फैलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी उपयोगकर्ता ने गलती से ऐसा ऐप इंस्टॉल कर लिया है, तो तुरंत मोबाइल को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करें, सभी बैंकिंग पासवर्ड बदलें और एंटीवायरस स्कैन चलाएं।

SBI ने दोहराया है that बैंक कभी भी फोन कॉल, SMS, WhatsApp या ईमेल के जरिए ग्राहकों से OTP, PIN, CVV या पासवर्ड साझा करने के लिए नहीं कहता। बैंक ने संदिग्ध संदेशों को तुरंत डिलीट करने और report.phishing@sbi.co.in पर रिपोर्ट करने की सलाह दी है।

साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज कराई जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सतर्कता और साइबर जागरूकता ही ऐसे खतरनाक फ्रॉड से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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