RIMS Imphal भर्ती प्रक्रिया में बायोमेट्रिक जांच के दौरान फिंगरप्रिंट mismatch से कथित इम्पर्सनेशन रैकेट का खुलासा।

RIMS Imphal भर्ती घोटाला: राजस्थान के युवक की गिरफ्तारी, बायोमेट्रिक जांच में खुला फर्जीवाड़ा, AIIMS परीक्षा से जुड़ा बड़ा इम्पर्सनेशन रैकेट उजागर

Team The420
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इंफाल। मणिपुर में एक बड़े भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें एक प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान पहचान और इम्पर्सनेशन से जुड़ा गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस मामले में राजस्थान के एक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर आरोप है कि उसने संगठित नेटवर्क के जरिए परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर किया।

गिरफ्तार आरोपी Jitendra Meena (30), राजस्थान के झिरोटा गांव, वार्ड नंबर 2 का निवासी है। यह कार्रवाई Regional Institute of Medical Sciences (RIMS) के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें भर्ती प्रक्रिया के दौरान फर्जीवाड़े और इम्पर्सनेशन रैकेट की आशंका जताई गई थी।

मामले में यह भी सामने आया है कि यह भर्ती प्रक्रिया All India Institute of Medical Sciences के अंतर्गत आयोजित कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जाम 2024 से जुड़ी हुई थी। आरोपी ने परीक्षा में भाग लिया और परिणाम के आधार पर उसे मल्टी-टास्किंग स्टाफ के पद पर चयनित किया गया, जिसके बाद 18 अगस्त 2025 को उसकी नियुक्ति RIMS इम्फाल में हो गई।

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शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रक्रिया के अनुसार हुआ, लेकिन 13 मार्च 2026 को नियुक्ति के बाद होने वाली अनिवार्य बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। इस जांच में चेहरे की पहचान, आईरिस स्कैन, हथेली और फिंगरप्रिंट जैसे कई स्तरों पर सत्यापन किया गया।

इसी दौरान बड़ा खुलासा हुआ कि भर्ती परीक्षा के समय दर्ज किए गए फिंगरप्रिंट और बाद में सत्यापन के दौरान लिए गए फिंगरप्रिंट मेल नहीं खा रहे थे। इस असमानता ने अधिकारियों को शक के घेरे में ला दिया कि चयनित व्यक्ति वही नहीं हो सकता जिसने वास्तव में परीक्षा दी थी।

जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि आरोपी ने या तो किसी अन्य व्यक्ति को अपनी जगह परीक्षा में बैठाया था या फिर किसी संगठित नेटवर्क की मदद से पहचान प्रणाली में हेरफेर किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि यह एक बड़े स्तर पर चलने वाले प्रॉक्सी उम्मीदवार रैकेट का हिस्सा हो सकता है।

इस रैकेट में कई स्तरों पर लोग शामिल होने की आशंका है, जिसमें उम्मीदवार, परीक्षा में बैठने वाले प्रॉक्सी व्यक्ति और प्रक्रिया में मदद करने वाले मध्यस्थ शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क तकनीक आधारित पहचान प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर काम करता है।

आरोपी को 5 मई 2026 को इम्फाल स्थित RIMS प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया और 11 मई तक पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। आगे की पूछताछ में नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में कई राज्यों में फैले हुए गिरोह शामिल हो सकते हैं, जो उम्मीदवारों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह परीक्षा में दूसरे लोगों को बैठाते हैं। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन भी हुआ हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि भर्ती परीक्षाओं में अब केवल पारंपरिक नकल ही नहीं, बल्कि हाई-टेक इम्पर्सनेशन और डिजिटल पहचान में हेरफेर भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हालांकि इस मामले में बायोमेट्रिक जांच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे फर्जीवाड़े को उजागर कर दिया।

अधिकारियों ने देशभर के संस्थानों को सलाह दी है कि बायोमेट्रिक सत्यापन को और मजबूत किया जाए तथा समय-समय पर ऑडिट प्रक्रिया अपनाई जाए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण के बाद इस रैकेट से जुड़े और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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