मुंबई। रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित ₹2,929 करोड़ के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ी सफलता मिली है। विशेष सीबीआई अदालत ने कंपनी के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ झुनझुनवाला को 5 जून तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि ऋण राशि के कथित दुरुपयोग, फंड डायवर्जन और वित्तीय निर्णयों में उनकी भूमिका की गहन जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
बुधवार को झुनझुनवाला को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया, जहां एजेंसी ने उनकी कस्टडी की मांग करते हुए कहा कि मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अभी बाकी है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि कंपनी के वित्तीय लेनदेन, ऋण राशि के उपयोग और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने के लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ जरूरी है। अदालत ने एजेंसी की दलीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें 5 जून तक सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
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यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है। जांच की शुरुआत भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों के कारण बैंकिंग प्रणाली को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार, ऋण राशि के उपयोग में कथित अनियमितताओं और शर्तों के उल्लंघन के चलते बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
सीबीआई के अनुसार, एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को विभिन्न चरणों में रुपये आधारित टर्म लोन उपलब्ध कराए थे। इस मामले में कुल बैंकिंग एक्सपोजर लगभग ₹19,694.33 करोड़ बताया गया है, जिसमें 17 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल थे। आरोप है कि ऋण की एक हिस्सेदारी का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया और धनराशि को अन्य कार्यों में लगाया गया, जिससे ऋणदाताओं को नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी का दावा है कि अमिताभ झुनझुनवाला कंपनी के वित्तीय संचालन के प्रमुख निर्णयकर्ताओं में शामिल थे। सीबीआई का कहना है कि उनके पास कॉरपोरेट फाइनेंस, बैंकिंग संबंधों, फंड मैनेजमेंट और ऋण राशि के उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार थे। एजेंसी के मुताबिक, बैंकों से प्राप्त धनराशि का उपयोग उनके निर्देशों और निगरानी में किया जाता था। जांचकर्ताओं का मानना है कि कुछ वित्तीय लेनदेन और फंड मूवमेंट से बैंकों को नुकसान पहुंचा।
फिलहाल सीबीआई कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेजों, आंतरिक संचार और कॉरपोरेट अनुमोदनों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऋण राशि का वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या उसे निर्धारित उद्देश्य से हटाकर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया गया था। इसके साथ ही विभिन्न संस्थाओं और खातों के बीच धन के प्रवाह की भी जांच की जा रही है।
झुनझुनवाला को हाल ही में दिल्ली की तिहाड़ जेल से मुंबई लाया गया था। वह पहले से एक अलग धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में न्यायिक हिरासत में थे, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। उत्पादन वारंट के आधार पर उन्हें मुंबई लाया गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
पिछले सप्ताह सीबीआई ने इस मामले में 16 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि उस चार्जशीट में झुनझुनवाला का नाम शामिल नहीं था, लेकिन एजेंसी ने संकेत दिया था कि जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई संभव है। उनकी गिरफ्तारी को उसी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
देश के बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों में गिने जा रहे इस प्रकरण पर वित्तीय क्षेत्र और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सीबीआई की पूछताछ और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
