चंडीगढ़। पंजाब और चंडीगढ़ के रियल एस्टेट सेक्टर में गुरुवार को उस समय बड़ा हलचल का माहौल बन गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित भूमि घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई बिल्डरों, डेवलपर्स और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी शुरू की। जांच एजेंसी ने मोहाली और चंडीगढ़ स्थित करीब एक दर्जन परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के बाद राज्य के रियल एस्टेट कारोबार और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी जिन परियोजनाओं और कंपनियों की जांच कर रही है, उनमें सनटेक सिटी प्रोजेक्ट, ABS टाउनशिप, आल्टस बिल्डर्स, धीर कंस्ट्रक्शंस और उनसे जुड़े कई सहयोगियों के नाम सामने आए हैं। ED का आरोप है कि इन परियोजनाओं से जुड़े लोगों ने जमीन उपयोग परिवर्तन यानी CLU (Change of Land Use) लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं और बाद में आम निवेशकों से बड़ी रकम जुटाकर कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़े नियमों का उल्लंघन करते हुए भूमि संबंधी स्वीकृतियां हासिल कीं। इसके बाद रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश और प्लॉट आवंटन के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये एकत्र किए गए। कई निवेशकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें तय समय पर न तो परियोजनाओं का कब्जा मिला और न ही उनकी रकम वापस की गई।
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ED की जांच में एक नाम नितिन गोहाल का भी सामने आया है। एजेंसी को संदेह है कि उसने कुछ बिल्डरों को GMADA की देनदारियों और फीस भुगतान में डिफॉल्ट के बावजूद संरक्षण दिलाने में मदद की। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि गोहाल ने कथित रूप से राजनीतिक स्तर पर प्रभाव का इस्तेमाल कर संबंधित कंपनियों को राहत दिलाने की कोशिश की। हालांकि इस मामले में किसी भी आरोपी की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
छापेमारी के दौरान ED अधिकारियों ने कई वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन से जुड़े कागजात और संपत्ति निवेश से संबंधित फाइलों को कब्जे में लिया है। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित रूप से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया और क्या धन को शेल कंपनियों या बेनामी निवेशों के जरिए कहीं और ट्रांसफर किया गया।
सूत्रों का कहना है कि जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या परियोजनाओं से जुड़े लोगों ने निवेशकों से प्राप्त धनराशि को निर्धारित निर्माण कार्यों के बजाय अन्य निजी या व्यावसायिक गतिविधियों में लगाया। यदि ऐसा पाया जाता है तो आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के अतिरिक्त प्रावधान भी लगाए जा सकते हैं।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरी कई हाउसिंग परियोजनाओं में नियामकीय निगरानी की कमी के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग बेहतर रिटर्न और विकसित टाउनशिप के वादों से आकर्षित होकर निवेश करते हैं, लेकिन कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं। ऐसे मामलों में वित्तीय पारदर्शिता की कमी और सरकारी मंजूरियों में कथित गड़बड़ियां बाद में बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं।
फिलहाल ED की यह कार्रवाई शुरुआती चरण में मानी जा रही है, लेकिन जांच एजेंसी आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ कर सकती है। माना जा रहा है कि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद कुछ आरोपियों को समन जारी किए जा सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब के रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही, नियामकीय निगरानी और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
