पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले में सामने आए एक हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अब कारोबारी ईमेल भी साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र की एक वाल्व मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से साइबर ठगों ने ईमेल स्पूफिंग तकनीक के जरिए ₹56 लाख की ठगी कर ली। हालांकि समय रहते शिकायत दर्ज होने और साइबर टीम की तेज कार्रवाई के कारण पूरी रकम वापस हासिल कर ली गई।
जानकारी के अनुसार, भोसरी स्थित कंपनी नियमित रूप से चीन की एक सप्लायर कंपनी के साथ कारोबार करती थी। अप्रैल महीने में कंपनी को सप्लायर के नाम से एक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें बैंक खाते बदलने की जानकारी दी गई थी। ईमेल पूरी तरह असली कारोबारी संवाद जैसा दिखाई दे रहा था, इसलिए कंपनी अधिकारियों को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।
साइबर अपराधियों ने असली ईमेल आईडी से मिलती-जुलती एक नकली ईमेल आईडी तैयार की थी। इसी फर्जी ईमेल के जरिए कंपनी को बताया गया कि भुगतान अब नए बैंक खातों में किया जाए। कारोबारी प्रक्रिया का हिस्सा समझते हुए कंपनी ने करीब ₹56 लाख संबंधित खातों में ट्रांसफर कर दिए।
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कुछ समय बाद जब कंपनी अधिकारियों ने चीन स्थित सप्लायर से भुगतान की पुष्टि करनी चाही, तब पूरा मामला सामने आया। असली कंपनी ने ऐसे किसी नए खाते की जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद कंपनी को समझ आया कि वह एक संगठित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी है।
मामले की सूचना मिलते ही साइबर पुलिस ने तत्काल तकनीकी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि रकम अमेरिका स्थित एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद साइबर टीम ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग चैनलों और संबंधित बैंक के नोडल अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया।
तकनीकी समन्वय और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए संदिग्ध खाते को तुरंत फ्रीज कराया गया। बाद में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पूरी राशि शिकायतकर्ता कंपनी के खाते में वापस ट्रांसफर कराई गई। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम होते हैं, क्योंकि रकम कई देशों के खातों में तेजी से घुमाई जाती है।
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ईमेल स्पूफिंग अब अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों का सबसे प्रभावी हथियार बनता जा रहा है। अपराधी पहले कंपनियों के ईमेल पैटर्न, सप्लायर नेटवर्क और भुगतान प्रक्रिया की रेकी करते हैं। इसके बाद बिल्कुल वैसी ही मेल आईडी बनाकर फर्जी भुगतान निर्देश भेजे जाते हैं।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, बिजनेस ईमेल कम्प्रोमाइज (BEC) और ईमेल स्पूफिंग जैसे हमले अब कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए सबसे बड़े डिजिटल खतरों में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अब केवल सिस्टम हैक नहीं कर रहे, बल्कि कंपनियों के भरोसे, कम्युनिकेशन सिस्टम और भुगतान प्रक्रिया को निशाना बना रहे हैं। विशेष रूप से इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ऐसी ठगी के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
विशेषज्ञों ने कंपनियों को सलाह दी है कि बैंक खाते बदलने से जुड़े किसी भी ईमेल पर बिना स्वतंत्र पुष्टि के भरोसा न करें। भुगतान से पहले वीडियो कॉल, आधिकारिक नंबर पर फोन या डिजिटल सत्यापन जैसी अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाना जरूरी हो गया है। केवल ईमेल के आधार पर वित्तीय निर्णय लेना अब बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है।
प्रो. त्रिवेणी सिंह ने यह भी कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह अब सोशल इंजीनियरिंग और ईमेल मैनिपुलेशन का इस्तेमाल कर कंपनियों के अकाउंट विभाग को निशाना बना रहे हैं। छोटी सी लापरवाही या जल्दबाजी करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने कंपनियों को नियमित साइबर ऑडिट और कर्मचारियों की डिजिटल ट्रेनिंग कराने की सलाह दी।
साइबर टीम ने कारोबारियों और उद्योग संगठनों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों को ईमेल फ्रॉड, फिशिंग और स्पूफिंग तकनीकों के बारे में नियमित प्रशिक्षण दें। साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डोमेन सिक्योरिटी और एडवांस मेल फिल्टर जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू करें।
डिजिटल भुगतान और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बढ़ते दायरे के बीच यह मामला इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक हैकिंग से आगे बढ़कर भरोसे और कारोबारी प्रक्रियाओं को निशाना बना रहे हैं। हालांकि इस मामले में समय पर कार्रवाई से ₹56 लाख बच गए, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि थोड़ी सी लापरवाही कंपनियों को करोड़ों के नुकसान में धकेल सकती है।
