PNB ने Reliance Telecom Limited के ₹201 करोड़ लोन खाते को फ्रॉड घोषित किया, फॉरेंसिक ऑडिट में फंड डायवर्जन और राउंड-ट्रिपिंग के संकेत मिले।

PNB का बड़ा एक्शन: ₹201 करोड़ लोन खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित, रिलायंस टेलीकॉम पर फंड डायवर्जन के आरोप

Team The420
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नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंक Punjab National Bank (PNB) ने रिलायंस समूह की कंपनी Reliance Telecom Limited (RTL) के ₹201.51 करोड़ के लोन खाते को “फ्रॉड” घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई बैंक की फ्रॉड एग्जामिनेशन कमेटी द्वारा की गई विस्तृत जांच और फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर की गई, जिसमें कथित तौर पर फंड डायवर्जन, राउंड-ट्रिपिंग और बैंक ऋण के दुरुपयोग जैसी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इस घटनाक्रम के बाद बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टर में हलचल तेज हो गई है।

स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी गई नियामकीय सूचना में Reliance Communications Limited (RCOM) ने बताया कि उसे 9 मई 2026 को PNB की ओर से औपचारिक संचार प्राप्त हुआ। बैंक ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और दस्तावेज जांच के दौरान संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद संबंधित ऋण खाते को “फ्रॉड” श्रेणी में वर्गीकृत करने का फैसला लिया गया।

बैंक की कार्रवाई में कुछ पूर्व निदेशकों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। जिन नामों का उल्लेख किया गया है उनमें ग्रेस थॉमस, सतीश सेठ, सत्येंद्र मोहनलाल सरूपरिया और दगदुलाल कस्तूरचंद जैन शामिल हैं। बैंक का आरोप है कि इन व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और कॉरपोरेट संरचना से जुड़े फैसलों में सामने आई है।

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फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयों के बीच कथित तौर पर सर्कुलर ट्रांजैक्शन किए गए, जिनका उद्देश्य कारोबार और राजस्व को वास्तविक से अधिक दर्शाना था। जांच में यह भी पाया गया कि लगभग ₹221.93 करोड़ की राशि RTL से RCOM को ट्रांसफर की गई। आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा म्यूचुअल फंड निवेश और अन्य गैर-व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सदस्य बैंकों से प्राप्त ऋण और एडवांस का बड़ा हिस्सा वास्तविक कारोबारी जरूरतों के बजाय संबंधित पक्षों को भुगतान करने में खर्च किया गया। जांच में रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड (RITL) की पुस्तकों में दर्शाई गई ₹1,347.70 करोड़ की देनदारियों और रिसीवेबल्स को भी संदिग्ध माना गया है। ऑडिट में संकेत मिले कि इनमें से कई एंट्रियां वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों से मेल नहीं खातीं।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब RCOM और RTL दोनों पहले से ही कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत हैं। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि जिन खातों और लेनदेन को लेकर यह कार्रवाई हुई है, वे दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले की अवधि से संबंधित हैं। कंपनी का कहना है कि वर्तमान प्रबंधन और समाधान प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 32A के तहत उपलब्ध सुरक्षा का सहारा ले सकती है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि किसी कंपनी का समाधान योजना के तहत अधिग्रहण या पुनर्गठन हो जाता है और उसे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) से मंजूरी मिल जाती है, तो कुछ मामलों में कंपनी को पुराने दायित्वों से राहत मिल सकती है। हालांकि, यह राहत पूर्व निदेशकों या संबंधित व्यक्तियों पर स्वतः लागू नहीं होती।

सूत्रों के अनुसार, PNB अब इस पूरे मामले की रिपोर्ट Reserve Bank of India (RBI) को भी भेजेगा। इसके बाद बैंकिंग नियामक और अन्य जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती हैं। वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कॉरपोरेट ऋण खातों में फंड डायवर्जन और संदिग्ध लेनदेन को लेकर बैंकों की निगरानी अब पहले से अधिक सख्त हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों का असर केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे बैंकिंग सेक्टर की जोखिम प्रबंधन प्रणाली, कॉरपोरेट गवर्नेंस और निवेशकों के भरोसे पर भी प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी और नियामकीय गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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