नोएडा। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सब्सिडी वाला लोन दिलाने का झांसा देकर देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का नोएडा पुलिस और साइबर सेल ने खुलासा किया है। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी विज्ञापन चलाकर बेरोजगार युवाओं और लोन की जरूरत वाले लोगों को निशाना बना रहा था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को विभिन्न सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ बताकर लोगों को भरोसे में लेते थे। वे दावा करते थे कि PMEGP योजना के तहत कम ब्याज दर पर सब्सिडी लोन तुरंत स्वीकृत कराया जा सकता है। इसके बाद पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन चार्ज और इंश्योरेंस के नाम पर अलग-अलग चरणों में रकम वसूली जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि पूरा नेटवर्क एक संगठित कॉलिंग सिस्टम के जरिए काम करता था, जिसमें अलग-अलग राज्यों में बैठे सदस्य टारगेटेड कॉलिंग करते थे। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे फर्जी विज्ञापनों में आकर्षक लोन ऑफर दिखाकर लोगों को लिंक या व्हाट्सएप चैट के जरिए जोड़ा जाता था। इसके बाद उन्हें फर्जी वेबसाइट और कॉल सेंटर के माध्यम से लगातार संपर्क में रखा जाता था।
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पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, 6 स्मार्टफोन और 15 रजिस्टर बरामद किए हैं, जिनमें कॉल डिटेल्स, संभावित पीड़ितों की सूची और लेनदेन से जुड़ा डेटा दर्ज पाया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह ने कई बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट माध्यमों का इस्तेमाल कर रकम को अलग-अलग चैनलों में ट्रांसफर किया ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।
अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों में भी फैले हुए थे। आरोपी खुद को विभिन्न वित्तीय संस्थानों और योजना एजेंसियों के प्रतिनिधि के रूप में पेश करते थे, जिससे लोगों का भरोसा आसानी से जीत लिया जाता था।
साइबर सेल की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह बेरोजगार युवाओं को विशेष रूप से टारगेट करता था, क्योंकि वे सरकारी नौकरी और लोन जैसी योजनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें तेजी से प्रोसेसिंग और गारंटीड लोन अप्रूवल का झांसा दिया जाता था।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के फाइनेंशियल ट्रेल की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की गई रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई और उसमें कौन-कौन शामिल है। साथ ही अन्य संभावित आरोपियों की पहचान के लिए डिजिटल डेटा और कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के साइबर फ्रॉड मामलों में सोशल मीडिया और फर्जी कॉलिंग सिस्टम का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना के नाम पर आने वाले अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी तरह की फीस या एडवांस भुगतान से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
