United States में सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच Operation Checkmate के तहत बड़ा अभियान चलाते हुए 36 कमर्शियल ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें करीब 30 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
यह कार्रवाई एरिजोना के यूमा सेक्टर में 11 से 15 मई के बीच की गई, जहां कुल 52 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से 36 लोग बिना वैध इमिग्रेशन दस्तावेजों के सेमी-ट्रक चलाते हुए पकड़े गए।
अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य ऐसे अवैध प्रवासियों की पहचान करना था जो भारी वाहन चलाकर सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। गिरफ्तार लोगों में भारत के अलावा मेक्सिको, अल सल्वाडोर और रूस के नागरिक भी शामिल हैं।
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जांच एजेंसियों ने पाया कि कई ड्राइवरों के पास विभिन्न अमेरिकी राज्यों द्वारा जारी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद थे, जबकि कुछ के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था। कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि लोगों के पास पहले से रोजगार अनुमति दस्तावेज थे, लेकिन वर्तमान नियमों के अनुसार वे अब मान्य नहीं थे।
सीमा सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित थी जो बिना वैध इमिग्रेशन स्थिति के भारी वाहन चला रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में न केवल इमिग्रेशन कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि हाईवे सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा होता है।
हिरासत में लिए गए सभी 52 लोगों के खिलाफ संघीय कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी के खिलाफ देश से निष्कासन (deportation) की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और कानूनी कार्रवाई पूरी होने तक उन्हें हिरासत में रखा जाएगा।
इस कार्रवाई को अमेरिका में इमिग्रेशन सख्ती और कमर्शियल ड्राइविंग नियमों के उल्लंघन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में ट्रकिंग सेक्टर में विदेशी कामगारों की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन वर्क परमिट और लाइसेंस सत्यापन को लेकर सख्ती भी लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों द्वारा जारी लाइसेंस और संघीय इमिग्रेशन नियमों के बीच तालमेल की कमी कई बार ऐसे मामलों में भ्रम पैदा करती है, जिससे बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां होती हैं।
ट्रकिंग सेक्टर को अमेरिका की सप्लाई चेन की रीढ़ माना जाता है, लेकिन ड्राइवरों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। इसी वजह से विदेशी ड्राइवरों पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन दस्तावेजों की जांच में खामियों से कानूनी और सुरक्षा जोखिम भी सामने आ रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियानों का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरी इमिग्रेशन और रोजगार प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना भी है। इसी दिशा में विभिन्न राज्यों में दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद प्रवासन नीति और विदेशों में रोजगार के अवसरों को लेकर कई देशों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर उन देशों में जहां बड़ी संख्या में लोग लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काम करते हैं।
सरकारी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि इमिग्रेशन और परिवहन कानूनों के उल्लंघन पर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। आने वाले समय में निगरानी और जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
कुल मिलाकर, इस ऑपरेशन को हाल के समय की सबसे बड़ी इमिग्रेशन प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जो सख्त नीति और बढ़ते प्रवर्तन रुख को दर्शाता है।
