नोएडा में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गौतम बुद्ध नगर पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक संगठित फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित रूप से फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक करंट अकाउंट खोलकर साइबर ठगी से आए पैसों को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध बनाने का काम कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अविनाश झा, हिमांशु कुमार और जितेंद्र दहिया उर्फ आशु के रूप में हुई है। तीनों दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैले साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े धन के ट्रांजैक्शन को संभाल रहा था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलते थे और इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त धन को जमा करने और आगे विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध धन को वैध वित्तीय लेन-देन की तरह दिखाना था।
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जांच के दौरान पुलिस को पांच मोबाइल फोन, नकदी, एक रबर स्टैम्प और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों में फर्जी कंपनियों के पंजीकरण और बैंकिंग से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को अंजाम देने में किया जाता था।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर सेक्टर-44 इलाके में की गई, जहां तीनों आरोपियों को दबोचा गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कई फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर अलग-अलग बैंक खाते खोलते थे।
प्रारंभिक जांच के अनुसार इन खातों में देशभर से साइबर ठगी के जरिए जुटाई गई रकम जमा होती थी, जिसे बाद में कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन किए गए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार इन आरोपियों से जुड़े मामलों की शिकायतें कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और पंजाब सहित कई राज्यों में दर्ज हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था।
पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है और यह भी जांच की जा रही है कि कुल कितने बैंक खाते इस अवैध गतिविधि में इस्तेमाल किए गए हैं। साथ ही इस नेटवर्क के वित्तीय कनेक्शन और लाभार्थियों की भी गहराई से जांच की जा रही है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि यह मामला साइबर ठगी और डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते खतरे को दर्शाता है।
पुलिस ने जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि किसी अजनबी के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म रजिस्टर न कराएं। ऐसा करना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।
साइबर पुलिस ने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति को अपने बैंक खाते में संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखाई दे या वह साइबर ठगी का शिकार हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं, क्योंकि डिजिटल फॉरेंसिक और बैंकिंग रिकॉर्ड से कई नए सुराग सामने आए हैं।
