नोएडा। सेक्टर-67 स्थित एक निर्माण कंपनी में लगभग ₹6 करोड़ की बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर थाना फेज-3 पुलिस ने कंपनी के एचआर मैनेजर, लेखाकार और उनके परिजनों सहित कुल 24 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला डिजिटल लेबर पेमेंट और मास्टर रोल में बड़े पैमाने पर हेरफेर से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, यह शिकायत कंपनी के निदेशक धीरेंद्र कुमार सिंह द्वारा अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र के माध्यम से की गई थी। धीरेंद्र कुमार सिंह की कंपनी “हिमकोन इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड” देश के विभिन्न राज्यों में निर्माण कार्य करती है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के अंदर लंबे समय से चल रही एक सुनियोजित साजिश के तहत करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
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शिकायत के अनुसार, रोहतास नामक व्यक्ति पिछले करीब 20 वर्षों से कंपनी में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। उसी के कहने पर वर्ष 2015 में उसके पुत्र सतेंद्र सिंह चौहान को कंपनी में एचआर मैनेजर एवं लेखाकार के पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद कमल कुमार को भी लेखाकार के रूप में जिम्मेदारी दी गई। दोनों को विभिन्न साइटों पर काम करने वाले श्रमिकों के वेतन भुगतान और मास्टर रोल के दस्तावेजीकरण का कार्य सौंपा गया था।
आरोप है कि इन दोनों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कंपनी की वित्तीय प्रणाली में गंभीर हेरफेर किया। अप्रैल 2026 में हुए आंतरिक ऑडिट के दौरान डिजिटल लेबर पेमेंट और मास्टर रोल रिकॉर्ड में भारी अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि असली मजदूरों की सूची हटाकर फर्जी कर्मचारियों के नाम जोड़े गए थे और उन्हीं के नाम पर भुगतान निकाला गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सतेंद्र सिंह चौहान ने फर्जी दस्तावेजों में अपनी ही मां को पुरुष के रूप में दर्ज कराते हुए वर्षों तक भुगतान प्राप्त किया। वर्ष 2018 से अब तक इस एक ही प्रविष्टि के माध्यम से लगभग ₹18,01,741 का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी पाया गया कि कई परियोजना प्रबंधकों के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर भुगतान शीट तैयार की गईं।
ऑडिट रिपोर्ट में कुल 17 ऐसे नाम सामने आए हैं, जो कभी भी कंपनी में कार्यरत नहीं रहे, लेकिन उनके नाम पर नियमित भुगतान किया जाता रहा। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए कंपनी को करीब ₹6 करोड़ का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है।
कोर्ट के आदेश के बाद थाना फेज-3 पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि फर्जी भुगतान के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस घोटाले में बाहरी एजेंसियों या अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका रही है।
फिलहाल सभी 24 आरोपियों के खिलाफ जांच तेज कर दी गई है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। इस मामले ने निर्माण क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों की आंतरिक वित्तीय निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
