आजमगढ़ साइबर ठगी मामले में आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित रूप से पेट्रोल पंप और जन सेवा केंद्रों के जरिए ठगी की रकम नकद कराई।

कस्टम ड्यूटी के नाम पर डिजिटल ठगी: नाइजीरियन साइबर मॉड्यूल का पर्दाफाश

Team The420
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लखनऊ। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए विदेशी नागरिक बनकर भारतीयों को महंगे गिफ्ट, डॉलर और लग्जरी पार्सल भेजने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले एक कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने खुलासा किया है। इस मामले में दिल्ली से एक नाइजीरियन नागरिक को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर कस्टम ड्यूटी, टैक्स और पार्सल क्लियरेंस शुल्क के नाम पर ऑनलाइन रकम वसूलने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए भरोसा कायम करता था और बाद में योजनाबद्ध तरीके से आर्थिक ठगी को अंजाम देता था।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान उचेनवा के रूप में हुई है। STF अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई लखनऊ निवासी एक पीड़ित की शिकायत के बाद शुरू की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों ने विदेशी नागरिक बनकर संपर्क किया, दोस्ती बढ़ाई और फिर विदेश से महंगे उपहार तथा डॉलर भेजने का दावा कर कई चरणों में पैसे ट्रांसफर करवाए।

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प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके सहयोगी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों की फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। इन प्रोफाइल्स में आकर्षक तस्वीरें, विदेशी जीवनशैली और महंगे लाइफस्टाइल से जुड़े पोस्ट डाले जाते थे ताकि भारतीय नागरिक आसानी से प्रभावित हो जाएं। कई मामलों में आरोपी खुद को डॉक्टर, इंजीनियर, बिजनेसमैन या सेना का अधिकारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करते थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जब पीड़ितों के साथ भावनात्मक और व्यक्तिगत बातचीत बढ़ जाती थी, तब उन्हें बताया जाता था कि विदेश से महंगे गिफ्ट, डॉलर, ज्वेलरी या अन्य कीमती सामान भेजा गया है। इसके कुछ समय बाद कथित कस्टम अधिकारी, एयरपोर्ट कर्मचारी या कुरियर एजेंट बनकर अन्य लोग पीड़ितों से संपर्क करते थे और पार्सल रिलीज कराने के नाम पर टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, विदेशी मुद्रा क्लियरेंस शुल्क या एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग चार्ज जमा कराने को कहते थे।

पीड़ितों को भरोसा दिलाने के लिए नकली एयरवे बिल, कस्टम क्लियरेंस सर्टिफिकेट और फर्जी दस्तावेज भी भेजे जाते थे। कई लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि पार्सल एयरपोर्ट पर रोक लिया गया है और निर्धारित शुल्क जमा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसी दबाव में आकर कई पीड़ित अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर देते थे।

जांच में यह भी पता चला है कि ठगी की रकम विभिन्न राज्यों के बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए ट्रांसफर कराई जाती थी ताकि पैसों के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। STF अब आरोपी के बैंकिंग नेटवर्क, मोबाइल नंबरों, डिजिटल डिवाइस और सोशल मीडिया संपर्कों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि “रोमांस और गिफ्ट स्कैम” तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में शामिल हो चुके हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऐसे गिरोह सोशल इंजीनियरिंग का सुनियोजित इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि अपराधी पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं, फिर भावनात्मक जुड़ाव और विदेशी उपहारों का लालच देकर आर्थिक जाल बिछाते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को तब तक ठगी का एहसास नहीं होता जब तक वे बड़ी रकम गंवा नहीं देते।

STF का कहना है कि मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात विदेशी प्रोफाइल पर आंख बंद कर भरोसा न करें और कस्टम ड्यूटी, पार्सल रिलीज या विदेशी मुद्रा शुल्क के नाम पर किसी भी खाते में पैसा ट्रांसफर करने से पहले सत्यापन अवश्य करें।

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