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जम्मू-कश्मीर में NIA की बड़ी कार्रवाई: जेईआई के टेरर फंडिंग नेटवर्क पर तीन ठिकानों पर छापे, दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद

Team The420
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जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से जुड़े कथित आतंक फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई संगठन की वित्तीय गतिविधियों और उसके संभावित आतंकी नेटवर्क से जुड़े लिंक की जांच के तहत की गई, जिसमें कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।

छापे श्रीनगर और शोपियां जिलों में किए गए, जहां से जांच एजेंसी को वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस मिले हैं। एजेंसी का मानना है कि ये सामग्री संगठन की गतिविधियों और उसके नेटवर्क की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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जांच के दौरान सामने आया है कि जेईआई पर आरोप है कि वह देश और विदेश से ‘चंदा’ और सामाजिक कार्यों के नाम पर धन एकत्र कर रहा था। यह रकम कथित रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता जैसे कार्यों के नाम पर जुटाई जाती थी, लेकिन जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसका एक हिस्सा हिंसक और अलगाववादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा था।

एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह धन विभिन्न नेटवर्क और कैडरों के माध्यम से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों तक पहुंचाया जाता था, जिनमें हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठन शामिल बताए जा रहे हैं। इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर समन्वय और गुप्त चैनलों के उपयोग की आशंका जताई गई है।

इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया है कि संगठन युवाओं को प्रभावित करने और भर्ती करने के लिए वैचारिक और धार्मिक गतिविधियों का सहारा लेता था। इन गतिविधियों के जरिए नए सदस्य बनाए जाने और उन्हें अलगाववादी विचारधारा की ओर प्रेरित करने के संकेत मिले हैं।

NIA अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इनमें बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल संचार और फंड ट्रेल से जुड़े अहम सबूत मिलने की संभावना है, जो पूरे मामले की परतें खोल सकते हैं।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में किन-किन व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका रही है तथा देश के भीतर और बाहर धन की आवाजाही किस तरह से की जा रही थी। इसके लिए कई स्तरों पर वित्तीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संगठनों द्वारा चंदे और सामाजिक कार्यों की आड़ में फंड जुटाना एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन चुका है, जिसका इस्तेमाल कई बार गैरकानूनी गतिविधियों में किए जाने के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर स्थित जमात-ए-इस्लामी को अवैध संगठन घोषित किया था, जिसके बाद इसकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इससे पहले भी इस संगठन से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

फिलहाल NIA की यह कार्रवाई शुरुआती चरण में है और एजेंसी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। बरामद डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में कई नई कड़ियाँ जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।

अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

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