इंदौर में कानून छात्र पर इंस्टाग्राम के जरिए AI से बने फर्जी NEET लीक पेपर बेचकर अभ्यर्थियों को गुमराह करने का आरोप लगा है।

NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच NTA में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: नए संयुक्त सचिव और निदेशकों की नियुक्ति

Team The420
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नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया है। शिक्षा मंत्रालय के तहत एजेंसी में नए संयुक्त सचिवों और निदेशक स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति को परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से NEET-UG परीक्षा की निष्पक्षता, सुरक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर एजेंसी लगातार आलोचनाओं का सामना कर रही थी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नई नियुक्तियों का उद्देश्य NTA के भीतर निगरानी तंत्र को मजबूत करना, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त नियंत्रण स्थापित करना है। हाल के घटनाक्रमों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप तेज कर दिया।

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बताया जा रहा है कि नियुक्त किए गए अधिकारियों में वित्तीय ऑडिट, प्रशासनिक निगरानी और डेटा प्रबंधन का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि परीक्षा संचालन से जुड़े संवेदनशील विभागों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से पेपर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और आंतरिक जवाबदेही को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे पहले भी NEET-UG और UGC-NET परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आने के बाद NTA की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग उठती रही है।

NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया जब कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक, संदिग्ध कोचिंग नेटवर्क और कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है और यह आशंका जताई जा रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सीमित नेटवर्क के जरिए कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया था। मामले के सामने आने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।

इसी बीच कई छात्र संगठनों और डॉक्टर संगठनों ने NTA में व्यापक सुधार की मांग उठाई है। कुछ संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए एजेंसी की संरचना और परीक्षा संचालन प्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग भी की है। छात्रों का कहना है कि लगातार विवादों से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली में भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

केंद्र सरकार पहले ही परीक्षा सुधारों के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर चुकी है। पूर्व वैज्ञानिकों और शिक्षा विशेषज्ञों की इस समिति ने परीक्षा सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड डिजिटल ट्रांसमिशन, प्रश्नपत्र वितरण और तकनीकी निगरानी से जुड़े कई सुझाव दिए थे। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इनमें से कई महत्वपूर्ण सुधार अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सके हैं। ताजा विवाद के बाद सरकार पर इन सिफारिशों को जल्द लागू करने का दबाव बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार अब NEET परीक्षा को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रणाली में बदलने की संभावना पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इससे फिजिकल प्रश्नपत्रों की छपाई और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिम कम किए जा सकेंगे। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि संस्थागत जवाबदेही और मजबूत निगरानी तंत्र भी जरूरी होगा।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बड़े परीक्षा घोटालों में संगठित नेटवर्क अक्सर सोशल इंजीनियरिंग, अंदरूनी लीक और डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक, परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए केवल तकनीक नहीं बल्कि मल्टी-लेयर इंटेलिजेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी जरूरी है।

सरकार की ओर से फिलहाल यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि NTA में किया गया यह प्रशासनिक फेरबदल छात्रों का भरोसा दोबारा कायम कर पाता है या नहीं।

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