मुंबई/नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में पेपर लीक के मामले ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर के फाउंडर और डायरेक्टर शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है, जिन पर संगठित गिरोह के साथ मिलकर प्रश्नपत्र लीक करने और उसे कई अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह गिरफ्तारी कई दिनों की निगरानी और पूछताछ के बाद की गई। CBI ने 14 मई को मोटेगांवकर के आवास पर छापेमारी की थी, जहां से उनके मोबाइल फोन में NEET-UG परीक्षा के कथित लीक प्रश्नपत्र बरामद किए गए। यह खुलासा जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि आरोपी केवल अकेला नहीं था, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा था, जो परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी हासिल कर उसे कुछ चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाने का काम करता था। यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ बताया जा रहा है।
FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort
CBI की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मोटेगांवकर ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 23 अप्रैल को प्रश्नपत्र और उत्तरों की अवैध कॉपी हासिल की थी। इसके बाद इन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे प्रसारित किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनके संबंध राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि इस पर अभी विस्तृत जांच जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक कोचिंग सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े रैकेट की ओर इशारा करता है, जो परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को प्रभावित करने में सक्षम रहा है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से सात घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई, जिसमें कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। CBI का दावा है कि यह गिरोह परीक्षार्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर अवैध लाभ कमाने का काम करता था।
इस घटनाक्रम के बाद शिक्षा जगत में भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि डिजिटल सबूतों में कई और नाम सामने आए हैं। फिलहाल मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की जांच की जा रही है।
इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा सुधार और सुरक्षा उपायों को लेकर बहस तेज कर दी है। छात्र संगठनों ने भी मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
CBI ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जाएगी, जिससे पूरे रैकेट की परतें खुल सकती हैं।
