भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और कुछ व्यक्तियों को अवैध वित्तीय लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोपों के बीच प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है, जब गurdaspur की तत्कालीन उपमंडल मजिस्ट्रेट अनूप्रीत कौर रंधावा को ₹1.63 करोड़ के राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार कर लिया गया। मामला वर्ष 2018–19 में राजस्थान-जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया से संबंधित बताया जा रहा है, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और चयनित व्यक्तियों को अनुचित लाभ देने के आरोप सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, आरोप है कि अनूप्रीत कौर रंधावा ने उस अवधि के दौरान जब वह पट्टी क्षेत्र में तैनात थीं, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में कुछ लोगों को नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया है कि मुआवजा वितरण के दौरान दस्तावेजी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। इसी आधार पर उन पर ₹1.63 करोड़ के कथित गबन और दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के समय वह गurdaspur में अपने आधिकारिक आवास पर मौजूद थीं। उन्हें पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया। यह मामला अचानक तब सुर्खियों में आया जब भूमि अधिग्रहण फाइलों की पुनः समीक्षा के दौरान कुछ संदिग्ध भुगतान और असामान्य लाभार्थियों के नाम सामने आए। इसके बाद पूरे लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू की गई, जिसमें कथित तौर पर कई स्तरों पर प्रक्रिया के उल्लंघन की बात कही गई।
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यह भी सामने आया है कि अनूप्रीत कौर रंधावा के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2021 में उन पर और उनके परिवार के एक सदस्य पर ₹88 लाख की वित्तीय अनियमितता से जुड़ा एक अलग मामला दर्ज किया गया था, जो अभी न्यायिक प्रक्रिया में विचाराधीन है। इस नए मामले ने उनकी भूमिका को लेकर सवाल और गंभीर कर दिए हैं तथा प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
जांच से जुड़े निष्कर्षों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के दौरान कुछ चुनिंदा व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए मुआवजा दरों और भूमि मूल्यांकन में कथित तौर पर बदलाव किए गए। आरोप यह भी है कि पात्रता मानकों को नजरअंदाज कर कई भुगतान स्वीकृत किए गए, जिससे परियोजना की लागत और सरकारी व्यय में असामान्य वृद्धि हुई।
मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता की कमी और दस्तावेजी नियंत्रण में ढील बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बनती है। वहीं, इस गिरफ्तारी के बाद संबंधित विभागों में भी आंतरिक समीक्षा और रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
फिलहाल अनूप्रीत कौर रंधावा से विस्तृत पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच जारी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में मुआवजा वितरण से जुड़े और भी कई पहलू सामने आ सकते हैं, जिससे यह मामला और व्यापक रूप ले सकता है।
