मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में शादी के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में युवकों और उनके परिवारों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले ऐसे परिवारों की तलाश करता था जहां बेटों की शादी में किसी तरह की दिक्कत हो रही हो, फिर शादी तय कराकर कुछ दिनों बाद दुल्हन जेवर और नकदी लेकर फरार हो जाती थी।
मामले में पुलिस ने बिजनौर के नजीबाबाद निवासी सोनाक्षी, उसकी मौसी कामिनी और कथित बुआ आशा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से जेवर भी बरामद किए हैं। वहीं गिरोह से जुड़े एक अन्य बिचौलिये रविंद्र की तलाश जारी है। जांच के अनुसार 10 मई को हरिद्वार में रामपुर गांव निवासी युवक ऋषभ के साथ शादी कराई गई थी और महज तीन दिन बाद 13 मई को दुल्हन घर से गायब हो गई।
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पीड़ित परिवार के मुताबिक घटना वाली रात दुल्हन घर की ऊपरी मंजिल पर सो रही थी। सुबह करीब चार बजे उसने साड़ियों को बांधकर रस्सी बनाई और उसी के सहारे छत से नीचे उतरकर फरार हो गई। जब परिवार के लोगों की आंख खुली तो कमरे से जेवर और अन्य सामान गायब मिला। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह सुनियोजित तरीके से शादी कराने का कारोबार चला रहा था। आरोपी परिवारों से पहले विश्वास कायम करते थे, फिर शादी कराने के नाम पर बड़ी रकम वसूलते थे। इस मामले में भी पीड़ित पक्ष से करीब ₹1.63 लाख लिए गए थे। शादी हरिद्वार के एक मैरिज हॉल में कराई गई थी ताकि सब कुछ वैध और सामान्य दिखाई दे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सोनाक्षी अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद मौसी कामिनी के साथ रह रही थी और आशा को रिश्तेदारी में बुआ बताया जाता था, जबकि वास्तव में यह पूरा नेटवर्क शादी के नाम पर ठगी के लिए काम कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह के सदस्य भोपा, मेरठ, बागपत और अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कई शादियां करा चुके हैं। हर मामले में पैटर्न लगभग एक जैसा था—जल्दबाजी में शादी, नकद लेन-देन, कुछ दिन बाद दुल्हन का फरार होना और संपर्क तोड़ देना।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह खासतौर पर उन परिवारों को निशाना बनाता था जहां सामाजिक या व्यक्तिगत कारणों से विवाह तय करने में कठिनाई आ रही हो। आरोपी परिवारों की मजबूरी और भावनात्मक दबाव का फायदा उठाकर उन्हें जल्दी शादी कराने का भरोसा देते थे। कई मामलों में शादी मंदिरों या धर्मशालाओं में कराई जाती थी ताकि औपचारिक जांच या पहचान सत्यापन से बचा जा सके।
मामले की जांच कर रही टीम अब गिरोह के आर्थिक लेन-देन, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क कई जिलों में सक्रिय हो सकता है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि इस तरह के विवाह आधारित फ्रॉड अब पारंपरिक धोखाधड़ी से आगे बढ़कर संगठित सोशल इंजीनियरिंग मॉडल का रूप ले चुके हैं। उनके अनुसार अपराधी परिवारों की सामाजिक चिंता, जल्द शादी कराने की मानसिकता और भावनात्मक दबाव का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी वैवाहिक संबंध को अंतिम रूप देने से पहले पहचान दस्तावेज, परिवार की पृष्ठभूमि, स्थानीय सत्यापन और आर्थिक लेन-देन की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल संपर्क और स्थानीय बिचौलियों के नेटवर्क के कारण इस तरह के विवाह फ्रॉड मामलों में तेजी आई है। ऐसे मामलों ने न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि कई परिवारों को मानसिक और सामाजिक संकट में भी डाल दिया है।
