मुंबई। मुंबई के मालाड ईस्ट में चल रहे स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) पुनर्विकास प्रोजेक्ट को लेकर बड़े वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में कुल ₹275 करोड़ से अधिक की अनियमितताओं का दावा किया गया है, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
यह प्रोजेक्ट शाह हाउसकॉन प्राइवेट लिमिटेड (SHPL) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसके प्रमोटर मंसुख शाह बताए जाते हैं। शिकायत में ब राइट रियल एस्टेट लिमिटेड सहित कई अन्य संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि परियोजना के नाम पर कई वर्षों तक अलग-अलग समझौते किए गए, जिनमें वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं।
शिकायत के अनुसार 7 अप्रैल 2026 को दर्ज किए गए दस्तावेजों में दावा किया गया है कि डेवलपर ने एक ही परियोजना से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ कई Memorandums of Understanding (MoUs) और विकास समझौते किए। इनमें से कई समझौते उस समय किए गए जब संपत्ति पर पहले से ही बंधक, कानूनी विवाद और अन्य वित्तीय दावे लंबित थे।
FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act
इस स्थिति ने एक ही प्रोजेक्ट पर कई पक्षों के अधिकार और वित्तीय दावों को लेकर टकराव की स्थिति पैदा कर दी। आरोपों के अनुसार, इन डील्स के माध्यम से फंड के दुरुपयोग, धन के इधर-उधर किए जाने और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले हैं।
सूत्रों के अनुसार शिकायत में यह भी कहा गया है कि परियोजना के तहत निवेशकों और संबंधित संस्थाओं से जुटाई गई धनराशि का उपयोग निर्धारित निर्माण और पुनर्विकास कार्यों के बजाय अन्य वित्तीय लेनदेन में किया गया। हालांकि, अभी तक किसी भी एजेंसी ने इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ED और SEBI को दी गई शिकायत में कई कंपनियों और निदेशकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विभिन्न संस्थाओं के बीच वित्तीय लेनदेन की जटिल संरचना तैयार कर फंड के स्रोत और उपयोग को अस्पष्ट रखा गया।
इस मामले में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि परियोजना के नाम पर भारी निवेश जुटाया गया, लेकिन जमीन पर प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी। साथ ही कई दस्तावेजों और समझौतों में एक ही संपत्ति को लेकर अलग-अलग दावे किए गए, जिससे धोखाधड़ी की आशंका और मजबूत होती है।
नियामक एजेंसियों ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं। ED की ओर से संभावित मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच की जा सकती है, जबकि SEBI वित्तीय बाजार और निवेश संरचना से जुड़े पहलुओं की समीक्षा कर सकती है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि SRA प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और निगरानी पहले से ही एक बड़ी चुनौती रही है। बड़े पैमाने पर भूमि पुनर्विकास, कई हितधारकों की भागीदारी और जटिल कानूनी ढांचे के कारण इस क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर बल्कि देशभर में चल रहे स्लम पुनर्विकास मॉडल पर भी असर डाल सकता है। इससे भविष्य में सख्त नियामक नियम और वित्तीय ऑडिट सिस्टम लागू किए जाने की संभावना बढ़ जाएगी।
फिलहाल संबंधित एजेंसियां शिकायत में उल्लिखित कंपनियों, वित्तीय रिकॉर्ड और समझौतों की विस्तृत जांच की तैयारी में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आने और जांच के दायरे के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में एक और बड़े वित्तीय विवाद की ओर इशारा करता है, जहां विकास परियोजनाओं के नाम पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
