मुंबई। मुंबई साइबर पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 के जरिए ऑनलाइन ठगी के मामलों में करीब ₹100 करोड़ के वित्तीय नुकसान को रोकने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि देश में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है।
अधिकारियों के अनुसार, यह हेल्पलाइन साइबर ठगी रोकने में एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है, जिसके जरिए पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद पुलिस और बैंकिंग संस्थान मिलकर संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज करने की कार्रवाई शुरू करते हैं, ताकि ठगी की गई रकम आगे ट्रांसफर या निकाली न जा सके।
पुलिस ने बताया कि इस सिस्टम के जरिए हजारों साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें फर्जी निवेश स्कीम, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग अटैक, बैंक अधिकारी बनकर की जाने वाली ठगी और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों का बड़ा हिस्सा शामिल है, जिसमें पीड़ितों को डराकर या भ्रमित कर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
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अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस पूरी व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पीड़ित कितनी जल्दी शिकायत दर्ज करता है। साइबर अपराधी अक्सर कुछ ही मिनटों में पैसे को कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे देर होने पर रिकवरी मुश्किल हो जाती है। शिकायत मिलते ही साइबर टीमें तुरंत ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग और संदिग्ध खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर देती हैं।
साइबर पुलिस ने पुष्टि की है कि कार्रवाई के दौरान कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, जो साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इनमें से कई खाते “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क का हिस्सा होते हैं, जिनका इस्तेमाल ठग पैसों को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसके स्रोत को छिपाने के लिए करते हैं।
अधिकारियों ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे बैंक अधिकारी, कस्टमर केयर प्रतिनिधि या निवेश सलाहकार बनकर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उनसे गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।
पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी संदिग्ध साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। देरी होने पर पैसे वापस मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है क्योंकि ट्रांजैक्शन तेजी से कई खातों में फैल जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ने के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। ठग अब फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, नौकरी के ऑफर, ओटीपी आधारित धोखाधड़ी और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, ओटीपी साझा न करने और बैंक डिटेल्स किसी से भी साझा न करने की सलाह दी गई है।
1930 हेल्पलाइन की सफलता यह दर्शाती है कि साइबर पुलिस, बैंक और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम समन्वय से बड़े वित्तीय नुकसान को रोका जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि साइबर सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग और तेज रिस्पॉन्स सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, ताकि साइबर फ्रॉड पर जल्द से जल्द रोक लगाई जा सके और नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके।
