मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में शिक्षा और वक्फ से जुड़े कथित बड़े घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 60 गज के एक छोटे से मदरसे में 5500 छात्रों को दिखाकर न केवल भारी छात्रवृत्ति का फर्जी लाभ उठाया गया, बल्कि सरकारी जमीन को भी फर्जी दस्तावेजों और तत्कालीन जिलाधिकारी के कथित जाली हस्ताक्षरों के जरिए वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज करा दिया गया। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार यह मामला उस समय के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शेषनाथ पांडेय से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि उनके कार्यकाल में योजनाओं और भूमि रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। जांच में यह भी सामने आया कि घोसीपुर गांव में स्थित करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि को कथित तौर पर अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज कर दिया गया।
FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort
आरोपों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेराफेरी की गई और प्रशासनिक रिकॉर्ड को गलत तरीके से संशोधित किया गया। यह भी दावा किया गया है कि उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर भूमि का नामांतरण कराया गया, जिससे सरकारी जमीन का स्वामित्व बदल गया।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मदरसों को मान्यता देने की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गईं। आरोप है कि कागजों में 60 से अधिक मदरसों को मान्यता दी गई, जबकि वास्तविकता में कई संस्थान या तो अस्तित्व में नहीं थे या बेहद सीमित स्तर पर संचालित हो रहे थे। किठौर क्षेत्र के एक मदरसे को लेकर यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मात्र 60 गज के परिसर में 5500 छात्रों का दाखिला दिखाकर छात्रवृत्ति जारी की गई।
इसके अलावा आरोप यह भी है कि छात्रवृत्ति वितरण में चयनात्मक लाभ दिया गया और कई समुदायों के छात्रों को योजनाओं से वंचित रखा गया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आंकड़ों के आधार पर सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जांच में दस्तावेजों के गायब होने या चोरी होने की बात सामने आई। हालांकि बाद में छापेमारी के दौरान वही दस्तावेज कार्यालय परिसर से पांच बक्सों में बरामद कर लिए गए, जिससे प्रशासनिक लापरवाही और संदेह और गहरा गया।
बताया जा रहा है कि पूर्व में इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में कार्रवाई रोक दी गई थी। अब नए सिरे से जांच शुरू होने के बाद एक बार फिर पूरे प्रकरण की परतें खुलने लगी हैं और करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट है कि भूमि रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति वितरण और मदरसा मान्यता प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। अब यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी तंत्र की किस स्तर तक इसमें भूमिका रही।
फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो पूरे प्रशासनिक ढांचे को झकझोर सकते हैं।
