मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में मेडिकल और इंश्योरेंस सिस्टम के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक ईएनटी विशेषज्ञ के नाम, हस्ताक्षर और लेटरपैड का कथित रूप से गलत इस्तेमाल कर फर्जी ओपीडी बिल और उपचार रसीदें तैयार करने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद एसएसपी के आदेश पर कोतवाली क्षेत्र में संबंधित इंश्योरेंस कंपनी और अन्य पक्षों के खिलाफ तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
वेस्टर्न कचहरी रोड, शिवपुरी निवासी डॉ. जगदीश सिंघल, जो ईएनटी (नाक, कान, गला) रोग विशेषज्ञ हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके नाम का उपयोग कर एक संगठित तरीके से फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार किए गए हैं। डॉ. सिंघल के अनुसार, वह पिछले 25 वर्षों से ईव्ज चौराहे के पास शिवम प्लाजा में अपना निजी क्लीनिक संचालित कर रहे हैं और उन्होंने कभी भी गढ़ रोड स्थित किसी भी अस्पताल में ओपीडी सेवा नहीं दी है।
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मामले की शुरुआत तब हुई जब उनके मोबाइल पर एक इंश्योरेंस फाइनेंस कंपनी से जुड़े कॉल के माध्यम से जानकारी मिली। इसके बाद उनके व्हाट्सएप पर एक ओपीडी पर्चा और मेडिकल रसीद भेजी गई, जिसमें एक महिला मरीज के नाम पर उपचार दर्शाया गया था। दस्तावेज में सहारा अस्पताल का नाम, मोहर और लेटरहेड भी मौजूद था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उक्त ओपीडी पर्चे और रसीद पर डॉ. जगदीश सिंघल के कथित हस्ताक्षर भी दर्ज थे। जबकि उनका कहना है कि उन्होंने न तो कभी उस अस्पताल में सेवा दी और न ही उस मरीज का कोई इलाज किया। उनके अनुसार यह पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके नाम का दुरुपयोग करने का मामला है।
डॉ. सिंघल ने आरोप लगाया है कि इस तरह के फर्जी मेडिकल बिल तैयार कर इंश्योरेंस क्लेम पास कराने की कोशिश की जा रही थी। उनका कहना है कि यह केवल उनके नाम की छवि को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें अस्पताल और इंश्योरेंस नेटवर्क की मिलीभगत से फर्जी दावे तैयार किए जाते हैं।
मामले के सामने आने के बाद उन्होंने तत्काल उच्च अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद एसएसपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने संबंधित इंश्योरेंस कंपनी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर और किस तकनीक के जरिए तैयार किए गए।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में अस्पताल के किसी कर्मचारी या बाहरी एजेंट की भूमिका शामिल है, जो इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर रहा था। पुलिस दस्तावेजों के डिजिटल फॉरमैट, व्हाट्सएप ट्रेल और क्लेम प्रोसेसिंग रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में इंश्योरेंस आधारित मेडिकल क्लेम में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इसमें कभी डॉक्टरों के नाम का दुरुपयोग किया जाता है, तो कभी अस्पतालों के लेटरहेड और मोहरों की नकल कर ली जाती है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर संकेत करता है, जो मेडिकल इंश्योरेंस सिस्टम में सेंध लगाने का काम कर सकता है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, क्लेम हिस्ट्री और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की भी गहन जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की परत-दर-परत जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
