लखनऊ के अमीनाबाद में FSDA ने फर्जी दवा सप्लाई और कागजी खरीद-फरोख्त के कथित नेटवर्क का खुलासा किया है।

दवा डिलीवरी के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: 4,000 ग्राहकों का डेटा खरीदकर 20 लाख की ठगी

Team The420
6 Min Read

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में साइबर पुलिस ने ऑनलाइन दवा डिलीवरी के नाम पर चल रहे एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह ऑनलाइन दवा ऑर्डर करने वाले लोगों का डेटा खरीदकर उन्हें फोन करता था और डिलीवरी के नाम पर रकम वसूलता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह ने देशभर के कम से कम 37 लोगों को निशाना बनाकर करीब ₹20 लाख की साइबर ठगी की।

साइबर पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय सरकार, मोहित सरकार, सुब्रमण्यम यामलवलसा और हर्ष सरकार के रूप में हुई है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले नोएडा सेक्टर-62 स्थित एक ऑनलाइन मेडिसिन कंपनी में काम करते थे। इसी दौरान उन्हें ग्राहकों के ऑर्डर सिस्टम, भुगतान प्रक्रिया और उपभोक्ताओं के डेटा तक पहुंच मिली, जिसका कथित तौर पर बाद में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया गया।

FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort

मामले का खुलासा तब हुआ जब Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) पोर्टल पर अलग-अलग राज्यों से कई शिकायतें दर्ज हुईं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें ऑनलाइन दवा डिलीवरी के नाम पर कॉल किए गए और भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के बहाने रकम ट्रांसफर कराई गई। शिकायतों की जांच के बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रेल के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई।

जांच अधिकारियों के अनुसार गिरोह लोगों को फोन कर खुद को ऑनलाइन मेडिसिन कंपनी का प्रतिनिधि बताता था। इसके बाद पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी दवाइयों की डिलीवरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और भुगतान की पुष्टि के लिए एक बारकोड, क्यूआर कोड या लिंक स्कैन करना होगा। कई लोग झांसे में आकर रकम ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस का कहना है कि भुगतान मिलते ही आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर संपर्क खत्म कर देते थे।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर दिल्ली निवासी मुन्ना कुमार शाह से ग्राहकों का डेटा खरीदा था। पूछताछ में सामने आया कि लगभग 50 ग्राहकों का डेटा ₹2,500 में खरीदा जाता था। इसी तरीके से गिरोह ने करीब 4,000 ग्राहकों की जानकारी हासिल की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि डेटा में उन लोगों की जानकारी शामिल थी जिन्होंने पहले ऑनलाइन दवा ऑर्डर की थी, इसलिए उन्हें आसानी से भरोसे में लिया जा सकता था।

सूत्रों के मुताबिक गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से साइबर ठगी को अंजाम देता था। आरोपी एयरटेल वाई-फाई और इंटरनेट राउटर के जरिए मोबाइल फोन कनेक्ट कर फर्जी पहचान पर खरीदे गए सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे। अधिकारियों के अनुसार ठगी पूरी होने के बाद इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर ब्लॉक या बंद कर दिए जाते थे ताकि जांच एजेंसियां डिजिटल ट्रैकिंग न कर सकें।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹20,000 नकद, आठ मोबाइल फोन, 10 सिम कार्ड, चार एटीएम कार्ड, एक होंडा शाइन मोटरसाइकिल, इंटरनेट उपकरण और अन्य डिजिटल डिवाइस बरामद किए हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इनमें से कुछ सामान कथित ठगी की रकम से खरीदे गए हो सकते हैं। बरामद मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की अब फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।

महत्वपूर्ण साइबर अपराध मामलों में renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि साइबर अपराधी अब डेटा लीक, सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल भुगतान सिस्टम का संगठित तरीके से दुरुपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ई-कॉमर्स, ऑनलाइन शॉपिंग और दवा डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़ा ग्राहक डेटा साइबर गिरोहों के लिए बड़ा हथियार बनता जा रहा है, क्योंकि इससे अपराधियों को सीधे संभावित पीड़ितों तक पहुंच मिल जाती है।

जांच अधिकारियों के अनुसार यह नेटवर्क हरियाणा, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय था। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, कॉल रिकॉर्ड और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन डिलीवरी, भुगतान या बैंकिंग कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बारकोड, क्यूआर कोड या पेमेंट लिंक को स्कैन करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। साथ ही नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे ओटीपी, बैंक डिटेल और निजी वित्तीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच और पूछताछ के दौरान इस साइबर नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article