लखनऊ। राजधानी लखनऊ की वृंदावन योजना में मकान बेचने के नाम पर कथित तौर पर की गई करीब ₹74 लाख की ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे दो इनामी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपियों पर ₹50-50 हजार का इनाम घोषित था। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये आरोपी एक ऐसे संगठित गिरोह का हिस्सा थे, जिसने फर्जी दस्तावेजों और झूठे आश्वासनों के जरिए एक महिला को लाखों रुपये की चपत लगाई।
मामला उन्नाव निवासी गायत्री देवी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने वृंदावन योजना क्षेत्र में स्थित एक मकान को बेचने का प्रस्ताव दिया और स्वयं को वैध अधिकारधारी बताकर भरोसा दिलाया कि संपत्ति का सौदा पूरी तरह कानूनी है। आरोप है कि इसके लिए फर्जी स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए और विभिन्न रिकॉर्ड के माध्यम से संपत्ति को वास्तविक बताने की कोशिश की गई। इसी आधार पर महिला से लगभग ₹73.99 लाख की राशि हासिल कर ली गई।
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मुकदमे में सुनील कुमार शुक्ला, रवि सिंह, सर्वेश कुमार पाण्डेय, गौरव अवस्थी, विपिन कुमार शुक्ला, रीतू सिंह और कंचनलता उर्फ अंजना सहित कई लोगों को नामजद किया गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि कथित धोखाधड़ी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं थी, बल्कि इसमें कई लोगों की भूमिकाएं तय थीं और पूरे घटनाक्रम को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, बैंकिंग लेन-देन और स्वामित्व रिकॉर्ड की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले कि कथित तौर पर तैयार किए गए दस्तावेजों का उपयोग कर शिकायतकर्ता को विश्वास दिलाया गया कि संपत्ति का सौदा पूरी तरह वैध है। जांच आगे बढ़ने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस के अनुसार, मामले में पहले भी कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी थी। इसी क्रम में पुलिस और सर्विलांस टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। मुखबिर से मिली सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर किसान पथ सर्विस लेन, रायबरेली रोड के पास से दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 46 वर्षीय सुनील कुमार शुक्ला और 36 वर्षीय विपिन कुमार शुक्ला के रूप में हुई है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से पूरे मामले की कई अहम कड़ियां जुड़ सकती हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे आपराधिक षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सभी बयानों और साक्ष्यों का स्वतंत्र सत्यापन किया जा रहा है और आगे की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।
इस मामले ने उस समय भी सुर्खियां बटोरी थीं जब शुरुआती स्तर पर जांच में लापरवाही के आरोप सामने आए थे। मामले के संबंध में विभागीय कार्रवाई के तहत दो चौकी प्रभारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद जांच को नई दिशा मिली और आरोपियों की तलाश तेज की गई।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी दस्तावेज, झूठे स्वामित्व रिकॉर्ड और मनोवैज्ञानिक विश्वास निर्माण की रणनीति का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश या खरीदारी से पहले भूमि अभिलेख, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, बंधक स्थिति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराना बेहद जरूरी है।
फिलहाल पुलिस वित्तीय लेन-देन, संपत्ति दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इसी तरह की अन्य संपत्ति डीलों में भी इस नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और गिरफ्तारियां तथा महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
