कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी अस्पताल के फर्जी डिग्री के आधार पर संचालित होने का आरोप लगाते हुए बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में अस्पताल की संचालिका डॉ. मीरा शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूरा मामला एक प्रसव के दौरान महिला की मौत से जुड़ा हुआ है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना निवासी महेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया कि 21 नवंबर 2025 की रात उनकी पत्नी पूनम देवी को प्रसव पीड़ा होने पर आशा कार्यकर्ता की सलाह पर गीतांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने पर शुरुआती इलाज और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर उनसे करीब 40 हजार रुपये जमा कराए गए। इसके बाद ऑपरेशन के दौरान स्थिति बिगड़ने लगी और कुछ ही समय में महिला की मौत हो गई।
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परिजनों ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज से मिलने नहीं दिया गया और बार-बार केवल पैसों की मांग की जाती रही। घटना के बाद परिवार ने इसे गंभीर लापरवाही और सुनियोजित धोखाधड़ी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल में इलाज की बजाय केवल औपचारिकता निभाई जा रही थी और व्यवस्था पूरी तरह से संदिग्ध थी।
जांच में सामने आया कि अस्पताल संचालिका डॉ. मीरा शर्मा की एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल पंजीकरण संख्या कथित रूप से वैध नहीं है। तीन चिकित्सकों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनके नाम पर दर्ज डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर किसी भी आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल से प्राप्त जानकारी में भी संबंधित पंजीकरण को फर्जी बताया गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अस्पताल का संचालन कथित रूप से बिना वैध चिकित्सा योग्यता के किया जा रहा था। जांच से जुड़े दस्तावेजों में कई अनियमितताओं की ओर भी इशारा किया गया है, जिससे अस्पताल के पंजीकरण और संचालन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। मामले में यह भी आरोप है कि अस्पताल संचालन में संचालिका के पति अरविंद और चिकित्सक डॉ. विकास मंडलोई की भूमिका भी रही है, जिनकी पहले से जांच चल रही है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। महिला की मौत के बाद तीन छोटे बच्चों का भविष्य संकट में आ गया है। परिवार ने आरोप लगाया कि आपात स्थिति में भी अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और लगातार आर्थिक मांग पर ही ध्यान केंद्रित किया।
स्थानीय स्तर पर इस मामले के सामने आने के बाद निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था और चिकित्सा पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। कई लोग इसे स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ी खामी मान रहे हैं, जहां बिना उचित जांच के अस्पताल संचालन की अनुमति मिल जाती है।
प्रशासनिक स्तर पर माना जा रहा है कि इस तरह के मामलों की विस्तृत जांच आवश्यक है, ताकि फर्जी डिग्री और अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की प्रक्रिया जारी है। यह मामला जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ चुका है।
