किशनगढ़। बांदरसिंदरी थाना क्षेत्र में ‘म्यूल हंटर अभियान’ के तहत साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें देशभर में करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल सामने आया है।
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े खातों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर 16 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें लगभग 19 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इन खातों में दिसंबर 2025 के दौरान लगभग 6.51 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जिसमें से करीब 26.83 लाख रुपये सीधे संदिग्ध ट्रांजैक्शन से जुड़े पाए गए।
इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी कुलदीप ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह अपने बैंक खातों को साइबर ठगों को 2 प्रतिशत कमीशन पर उपलब्ध कराता था और यह रकम आगे नेटवर्क में घुमाई जाती थी।
पुलिस ने इस मामले में राहुल धोलपुरिया नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ने के गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को पार्ट टाइम जॉब, ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर फंसाकर उनसे ठगी करता था।
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इसके बाद उनसे सर्विस चार्ज, जीएसटी और विड्रॉल चार्ज के नाम पर रकम वसूली जाती थी और ठगी की राशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे मामले में म्यूल अकाउंट नेटवर्क सबसे खतरनाक होते हैं, क्योंकि ये ठगी की रकम को तेजी से कई परतों में फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी निवेश योजनाओं और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों के जरिए आम लोगों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।
पुलिस ने अब अन्य बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच तेज कर दी है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला देशभर में तेजी से बढ़ रहे म्यूल अकाउंट आधारित साइबर अपराध नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है, जहां छोटे कमीशन के लालच में लोग बड़े वित्तीय अपराधों का हिस्सा बन जाते हैं और पूरे सिस्टम को प्रभावित करते हैं।
आरोपियों का नेटवर्क व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सक्रिय रहता था, जहां फर्जी जॉब, निवेश और ट्रेडिंग ग्रुप बनाकर लोगों को फंसाया जाता था।
बैंक खातों में रकम आने के बाद उसे कई लेयर में ट्रांसफर कर क्रिप्टो और अन्य डिजिटल माध्यमों से छिपाने का प्रयास भी किया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रेल ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
उन्होंने आगे कहा कि नागरिकों को किसी भी अनजान निवेश योजना, पार्ट टाइम जॉब ऑफर या ज्यादा रिटर्न देने वाले ऑनलाइन स्कीम से सावधान रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करनी चाहिए।
पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है तथा आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह पूरा मामला साइबर ठगी के बदलते पैटर्न को दर्शाता है, जहां अपराधी अब पारंपरिक तरीकों के बजाय बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से ठगी को अंजाम दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में साइबर फ्रॉड की घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे आम नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होगा और बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
