मलेशिया में ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सरकार साइबर अपराधों से निपटने के लिए नया कानून ला रही है।

केरल में ₹1.19 करोड़ ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले का खुलासा: फर्जी यूके निवेश कंपनी बनकर ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

Team The420
4 Min Read

तिरुवनंतपुरम में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी मामले का खुलासा करते हुए 47 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग स्कीम के जरिए एक व्यक्ति से ₹1.19 करोड़ से अधिक की ठगी की।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान पलक्कड़ जिले के कन्नाडी निवासी रमेश के रूप में हुई है, जिसे इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का मुख्य संचालक माना जा रहा है। पीड़ित को सोशल मीडिया के जरिए निशाना बनाया गया और उसे एक फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने के लिए राजी किया गया।

जांच में सामने आया है कि ठगों ने शुरुआत में सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़ित से संपर्क किया और खुद को एक प्रतिष्ठित यूनाइटेड किंगडम आधारित निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके प्लेटफॉर्म में निवेश करने पर दोगुने से भी अधिक रिटर्न मिलेगा।

FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort

विश्वास जीतने के लिए आरोपी और उसके सहयोगियों ने ऐसे मोबाइल एप्लिकेशन और व्हाट्सऐप ग्रुप तैयार किए, जो देखने में पूरी तरह असली शेयर बाजार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसे लगते थे। इनमें फर्जी चार्ट, लाभ और बैलेंस दिखाकर निवेशकों को भ्रमित किया जाता था।

इन झूठे दावों पर भरोसा करके पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। लेकिन जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उसे लगातार मना कर दिया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, ठगों ने बहाने बनाना शुरू कर दिया—जैसे तकनीकी समस्या, वेरिफिकेशन प्रक्रिया या अतिरिक्त चार्ज—और इसी तरह पीड़ित को पैसे वापस नहीं लेने दिए गए।

धोखाधड़ी का एहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद तिरुवनंतपुरम सिटी पुलिस के तहत एक विशेष जांच टीम गठित की गई और व्यापक साइबर जांच शुरू हुई।

जांचकर्ताओं ने बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, मोबाइल टावर लोकेशन और डिजिटल संचार के निशानों का विश्लेषण कर आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से कई मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए हैं।

अधिकारियों का मानना है कि आरोपी इस पूरे रैकेट का प्रमुख संचालक था और पहचान छिपाने के लिए कई फर्जी डिजिटल प्रोफाइल और बैंक खातों का इस्तेमाल करता था।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वास्तविक ट्रेडिंग सिस्टम जैसा माहौल बनाया गया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपी और उसके साथी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते थे, जिसमें व्हाट्सऐप ग्रुप्स में फर्जी “लाभ की कहानियां” और नकली मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जाते थे, ताकि अधिक निवेश कराया जा सके।

अधिकारियों ने लोगों को ऐसे निवेश घोटालों से सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया या अनजान मैसेजिंग ग्रुप्स के जरिए मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, खासकर जब वे असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा करते हों।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सेबी (SEBI) द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म ही वैध होते हैं और कोई भी वैध निवेश कंपनी निश्चित या गारंटीड रिटर्न का दावा नहीं करती।

फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस ठगी में कितने और लोग शामिल हैं और अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया है।

मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद इस घोटाले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article