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फल कारोबार की आड़ में फ्रॉड का खेल: दशकभर फरार रहने के बाद आरोपी गिरफ्त में

Team The420
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नई दिल्ली। दिल्ली में कश्मीरी सेब कंसाइनमेंट के नाम पर कथित कारोबारी धोखाधड़ी के एक दशक पुराने मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग से 38 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो पिछले लगभग 10 वर्षों से फरार चल रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी लगातार अपने ठिकाने, मोबाइल नंबर और संपर्क नेटवर्क बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा और छोटे स्तर पर फल कारोबार की आड़ में गतिविधियां संचालित करता रहा।

मामला वर्ष 2016 में सामने आया था, जब दिल्ली के महेंद्र पार्क थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा केस दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने कश्मीरी सेब की खेप सप्लाई करने का भरोसा देकर उससे अलग-अलग तारीखों में ₹5,08,700 लिए, लेकिन न तो कोई कंसाइनमेंट भेजा गया और न ही रकम लौटाई गई। शिकायतकर्ता का दावा था कि आरोपी ने खुद को भरोसेमंद कारोबारी बताकर लंबे समय तक व्यावसायिक संबंध बनाए रखे और बाद में अचानक संपर्क तोड़ दिया।

जांच के दौरान आरोपी फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था। मामला कई वर्षों तक लंबित रहा क्योंकि आरोपी ने खुद को ट्रेस होने से बचाने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके अपनाए थे। बाद में यह केस दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपा गया, जिसने विशेष टीम बनाकर जम्मू-कश्मीर में तकनीकी निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन शुरू किया।

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जांच टीम ने अनंतनाग और आसपास के क्षेत्रों में पुराने पते खंगाले, स्थानीय व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जुड़े लोगों से पूछताछ की तथा आरोपी के पुराने संपर्कों की पहचान करने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने वर्षों तक अपने पुराने सामाजिक और कारोबारी नेटवर्क से दूरी बनाए रखी ताकि उसकी लोकेशन और गतिविधियों का पता न लगाया जा सके।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी लगातार सिम कार्ड बदलता था और किसी एक मोबाइल नंबर का लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करता था। वह सीधे संपर्क से बचने के लिए सेकेंडरी कॉन्टैक्ट्स और अप्रत्यक्ष माध्यमों का इस्तेमाल करता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी तकनीकी निगरानी से बचने के लिए सीमित डिजिटल पहचान रखता था और खुद को सामान्य फल कारोबारी की तरह पेश करता रहा।

लगातार तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 13 मई को अनंतनाग के फल एवं सब्जी बाजार क्षेत्र में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसकी मुलाकात शिकायतकर्ता से वर्ष 2011 में एक साझा परिचित के जरिए हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच सेब कारोबार को लेकर लेनदेन शुरू हुआ।

जांच एजेंसियों के अनुसार बाद में भुगतान विवाद बढ़ने पर आरोपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया और कथित रूप से रकम लौटाने से इनकार कर दिया। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अपना मूल निवास छोड़ दिया था और अनंतनाग के दूसरे इलाके में रहकर छोटे स्तर पर थोक कारोबार जारी रखा।

साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि कारोबारी धोखाधड़ी के मामलों में अब आरोपी केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि तकनीकी तौर पर खुद को छिपाने के लिए मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल पहचान और स्थानीय सपोर्ट सिस्टम का भी इस्तेमाल करते हैं। “प्रख्यात साइबर क्राइम एक्सपर्ट और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह” के अनुसार, लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपी अक्सर सोशल इंजीनियरिंग, सीमित डिजिटल उपस्थिति और स्थानीय नेटवर्क की मदद से जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञों ने व्यापारियों और सप्लाई चेन से जुड़े कारोबारियों को सलाह दी है कि बड़े लेनदेन से पहले कारोबारी सत्यापन, लिखित अनुबंध और बैंकिंग ट्रेल सुनिश्चित करें। केवल व्यक्तिगत भरोसे या मौखिक समझौते के आधार पर बड़ी रकम ट्रांसफर करना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

फिलहाल पुलिस आरोपी के वित्तीय रिकॉर्ड, पुराने कारोबारी लेनदेन और संभावित सहयोगियों की जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। मामले में आगे की पूछताछ और वित्तीय दस्तावेजों की जांच जारी है।

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