कर्नाटक के चिकमगलूर में महिला के बैंक खाते से बिना OTP, लिंक क्लिक या अलर्ट के ₹18.24 लाख की रहस्यमय साइबर ठगी सामने आई।

ना OTP, ना लिंक—फिर भी ₹18.24 लाख साफ: कर्नाटक में महिला के बैंक खाते से रहस्यमय साइबर फ्रॉड

Team The420
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कर्नाटक के चिकमगलूर जिले में साइबर फ्रॉड का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा और डिजिटल ट्रांजैक्शन सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला के बैंक खाते से बिना किसी OTP, लिंक क्लिक या संदिग्ध ऐप डाउनलोड के करीब ₹18.24 लाख रुपये धीरे-धीरे गायब हो गए।

पीड़ित महिला का बैंक खाता IDFC First Bank से जुड़ा बताया गया है। शिकायत के अनुसार, 4 मार्च से 21 अप्रैल के बीच अलग-अलग तारीखों पर खाते से कई किश्तों में रकम निकाली गई। सबसे हैरानी की बात यह है कि किसी भी ट्रांजैक्शन के दौरान न तो OTP आया, न ही कोई अलर्ट मैसेज मिला और न ही मोबाइल पर कोई संदिग्ध लिंक या APK फाइल दिखाई दी।

महिला को इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब उन्होंने अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट चेक किया। जांच में सामने आया कि पूरी रकम अलग-अलग अनजान बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। इससे यह आशंका गहराई है कि पैसा कई लेयर वाले डिजिटल नेटवर्क के जरिए निकाला गया हो सकता है, जिससे ट्रांजैक्शन ट्रैक करना मुश्किल हो गया है।

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घटना सामने आने के बाद महिला ने तुरंत चिकमगलूर साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड है, जिसमें बिना किसी यूजर इंटरैक्शन के उनके खाते से पैसे निकाले गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और उन बैंक खातों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर हुई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल सामान्य OTP-आधारित फ्रॉड से अलग हो सकता है और इसमें बैकएंड सिस्टम या अकाउंट एक्सेस से जुड़ी कोई तकनीकी कमजोरी शामिल हो सकती है। फिलहाल बैंकिंग लॉग्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।

इस घटना ने स्थानीय स्तर पर साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। चिकमगलूर जिले में साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल जनवरी से अब तक जिले में करीब 29 साइबर फ्रॉड के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कुल मिलाकर 4 से 5 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।

इनमें ज्यादातर मामले ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कीम, फर्जी लिंक, केवाईसी अपडेट फ्रॉड और दोगुना पैसा कमाने के लालच से जुड़े हुए हैं। हालांकि, पुलिस ने इनमें से केवल कुछ मामलों को ही सुलझाया है, जबकि बाकी की जांच अभी जारी है।

साइबर पुलिस ने लोगों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या इन्वेस्टमेंट ऑफर पर भरोसा न करें। साथ ही बैंकिंग डिटेल्स, OTP या किसी भी तरह की निजी जानकारी साझा न करने की सलाह दी गई है।

अधिकारियों ने यह भी कहा है कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में शिकायत दर्ज कराने से पैसे रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ यूजर अलर्ट सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि बिना किसी चेतावनी के होने वाले ट्रांजैक्शन को रोका जा सके।

फिलहाल पुलिस और बैंकिंग टीमें संयुक्त रूप से इस मामले की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बिना OTP और बिना यूजर इंटरैक्शन के यह ट्रांजैक्शन कैसे संभव हुआ।

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