कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर क्राइम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रावतपुर पुलिस ने केशवपुरम इलाके से दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देशभर में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क के लिए “म्यूल अकाउंट” उपलब्ध कराने का काम कर रहा था। जांच में खुलासा हुआ है कि इन खातों के जरिए करीब ₹14 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन हुआ है, जो देश के 13 राज्यों से जुड़ी साइबर ठगी की रकम से संबंधित पाया गया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुमित कश्यप और नवीन श्रीवास्तव के रूप में हुई है। सुमित सीसामऊ के पीरोड का निवासी है और 12वीं पास है, जबकि नवीन कर्नलगंज का रहने वाला है और उसने 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। दोनों आरोपी केशवपुरम में किराए के मकान में रहकर टेलीग्राम ऐप के जरिए संचालित एक संगठित साइबर नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे।
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जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी देशभर में साइबर ठगी से जुड़े गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिन्हें “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल शेयर मार्केट निवेश, ऑनलाइन गेमिंग और फर्जी प्रॉफिट स्कीम के नाम पर लोगों से ठगी की गई रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पुलिस को पांच ऐसे बैंक खाते मिले हैं, जिनमें भारी मात्रा में लेनदेन दर्ज है और जिनके खिलाफ राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 13 शिकायतें दर्ज हैं।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, जांच में पाया गया कि इन पांच खातों के जरिए करीब ₹14 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ है। इनमें से एक खाता सुमित कश्यप के नाम पर एक्सिस बैंक की बिरहाना रोड शाखा में खोला गया था। अकेले इस खाते के खिलाफ आठ अलग-अलग साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं, जबकि बाकी चार खातों पर पांच शिकायतें दर्ज की गई हैं।
पुलिस ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क दिल्ली में बैठे एक मास्टरमाइंड ‘तोमर’ के इशारे पर काम कर रहा था। आरोपी उसे फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और बदले में उन्हें कमीशन दिया जाता था। फिलहाल ‘तोमर’ फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमें अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसी नेटवर्क ने श्यामनगर के एक इंजीनियर को फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर ₹97 लाख की ठगी का शिकार बनाया था। पीड़ित ने अपनी और अपने परिवार व दोस्तों की बचत से रकम निकालकर आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दी थी। यही राशि बाद में इन म्यूल खातों में ट्रेल के रूप में दर्ज मिली।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर पूरे देश में फैले साइबर फ्रॉड को सपोर्ट कर रहा था। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और इसके और भी सदस्य सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूल अकाउंट साइबर अपराध की सबसे खतरनाक कड़ियों में से एक हैं, क्योंकि इनके जरिए ठगी की रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर ट्रेसिंग को मुश्किल बना दिया जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर छोटे शहरों और कम पढ़े-लिखे युवाओं को लालच देकर नेटवर्क में शामिल किया जाता है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और उनके बैंक खातों, डिजिटल डिवाइस और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे साइबर नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे कई राज्यों में फैले ठगी रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है।
