कानपुर में ₹14 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, 10वीं और 12वीं पास दो युवक गिरफ्तार

12वीं और 10वीं पास युवकों के खातों में ₹14 करोड़ का ट्रांजैक्शन: साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, दो गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रावतपुर पुलिस और पश्चिम जोन की साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन में करीब ₹14 करोड़ के ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों से जुड़ा हो सकता है।

पुलिस के अनुसार कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से प्राप्त इनपुट के आधार पर की गई। पोर्टल ने कानपुर के केशवपुरम क्षेत्र को साइबर अपराध से जुड़े संभावित हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया था। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों की निगरानी शुरू की।

FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders

जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे बैंक खाते मिले जिनमें बड़ी मात्रा में संदिग्ध लेनदेन दर्ज थे। तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता क्रमशः 12वीं और 10वीं बताई गई है। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से चार मोबाइल फोन और लगभग ₹42 हजार नकद बरामद किए गए।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों तथा उनके परिचितों के नाम से संचालित पांच बैंक खातों में करीब ₹14 करोड़ की राशि का आवागमन हुआ था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन खातों का उपयोग कथित रूप से साइबर ठगी से प्राप्त धन को प्राप्त करने, स्थानांतरित करने और आगे विभिन्न खातों में भेजने के लिए किया जाता था।

पुलिस को मिले डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिला है कि गिरोह ने केवल कानपुर ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, पंजाब, केरल, गुजरात, महाराष्ट्र समेत लगभग 13 राज्यों के लोगों को निशाना बनाया। जांच में यह भी पता चला कि विभिन्न निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में संचालित कई खातों का उपयोग कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में किया जा रहा था। ऐसे खाते अक्सर साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम प्राप्त करने और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से संचालित नेटवर्क से जुड़े थे। इसी नेटवर्क के जरिए लोगों को शेयर ट्रेडिंग, निवेश योजनाओं और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था। जब पीड़ित निवेश या शुल्क के नाम पर धनराशि जमा कर देते थे, तब उनसे संपर्क समाप्त कर दिया जाता था या उन्हें नए भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता था।

जांच के दौरान एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति का नाम भी सामने आया है, जिसके बारे में बताया गया कि वह दिल्ली में रहकर नेटवर्क के संचालन में भूमिका निभाता था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क इससे कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।

इसी साइबर अपराध श्रृंखला के बीच कानपुर में एक और डिजिटल धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एयरफोर्स में तैनात एक एयरमैन ने शिकायत दर्ज कराई है कि रेलवे स्टेशन पर मोबाइल फोन चोरी होने के बाद उसके बैंक खाते से ₹94 हजार निकाल लिए गए। आरोप है कि बदमाशों ने मोबाइल में उपलब्ध व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग कर खाते तक पहुंच बनाई और धनराशि ट्रांसफर कर ली।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आज के अधिकांश साइबर अपराध केवल तकनीकी हैकिंग का परिणाम नहीं होते, बल्कि सामाजिक इंजीनियरिंग और वित्तीय लालच पर आधारित होते हैं। अपराधी लोगों को निवेश, ट्रेडिंग या त्वरित लाभ का झांसा देकर स्वयं ही पैसे ट्रांसफर करवाने में सफल हो जाते हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी अनजान निवेश प्रस्ताव, टेलीग्राम ग्रुप या ऑनलाइन कमाई के दावों से सतर्क रहने की अपील की।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और बैंक खातों, मोबाइल डेटा तथा डिजिटल लेनदेन की फोरेंसिक जांच जारी है। जांच एजेंसियों का प्रयास है कि पूरे नेटवर्क की पहचान कर साइबर ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों तक भी पहुंचा जा सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article